अनलॉक-1 के तहत बीते एक पखवाड़े में महज 277 स्थानीय लोग ही गंगोत्री और 30 लोग यमुनोत्री धाम पहुंचे। इन्हें भी धामों और यात्रा पड़ावों पर सुविधाओं के अभाव में पाला छूकर लौटना पड़ा। ऐसे में यात्रा कारोबारियों को उत्तराखंड वासियों के लिए चारधाम यात्रा से भी कोई विशेष फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है।
यात्रा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यात्रा के पीक सीजन का समय बीत चुका है और मानसून सीजन में पुराने कड़वे अनुभवों के चलते यात्रा ठप ही रहती है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच लोग यात्रा से परहेज कर रहे हैं। गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष पं. सुरेश सेमवाल ने कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच मानसून सीजन में चारधाम यात्रा शुरू करने के निर्णय को औचित्यहीन करार दिया। उन्होंने कहा कि धामों में तर्पण, पिंडदान, मंदिर में दर्शन एवं पूजा-अर्चना, तिलक लगाना, कलावा बांधना आदि धार्मिक कार्य सामाजिक दूरी के साथ होना संभव नहीं है। धामों में एक भी होटल, ढाबा और दुकान नहीं खुले हैं। ऐसे में अन्य जनपदों से तीर्थयात्रियों को चारधाम यात्रा पर भेज कर सरकार मुसीबत ही खड़ी करेगी। तीर्थ पुरोहित सुबह और शाम की आरती एवं भोग लगाने के लिए मंदिर के द्वार खोलेंगे। शेष समय मंदिर के बाहर का चैनल बंद ही रहेगा।