स्वारी गाड़ के कटाव से बार्सू गांव में कई घर, बेसिक व जूनियर हाईस्कूल और कई अन्य परिसंपत्तियां जमींदोज होनी शुरू हो गई है। डीएम ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए अब तक पुनर्वास के लिए पहले दौर में सूचीबद्ध 11 गांवों से बाहर रखे गए बार्सू को भी इसमें शामिल करने का निर्णय लिया है।
बादल फटने से 2012 में बार्सू गांव के नीचे बहने वाली स्वारी गाड़ ने भारी तबाही मचाई थी। इसमें गंगोत्री हाईवे तथा पाला मनेरी प्रोजेक्ट के तीन मोटर पुल बह गए थे। तभी से गाड़ के ऊपर कमजोर मलबे वाली पहाड़ी ढाल पर बसे बार्सू गांव में भूधंसाव की शुरूआत हो गई थी।
50 से ज्यादा घरों की दीवारों पर दरार गहराने लगी है। कई खेत भूधंसाव की भेंट चढ़ गए हैं। बेसिक, जूनियर हाईस्कूल और पर्यटन विभाग की ओर से निर्मित कम्युनिटी सेंटर के भवन की दीवारों पर दरार आ गई है। प्रधान अनीता, ग्रामीण गजवेंद्र, ओमप्रकाश, भरत सिंह जगवीर का कहना है कि यदि शीघ्र उनके विस्थापन की व्यवस्था नहीं की गई, तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
पहले दौर में विस्थापन की श्रेणी में रखे गए 11 गांव के साथ अब बार्सू को भी शामिल किया गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बुलाकर शीघ्र जूनियर तथा बेसिक स्कूल की कक्षाओं को शीघ्र सुरक्षित स्थान पर लगाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिया गया है।
दीपेंद्र चौधरी डीएम उत्तरकाशी।
संबंधित अध्यापकों व शिक्षा अधिकारियों को बुलाकर उन्हें हर हालत में सोमवार 22 अगस्त से दोनो विद्यालयों की कक्षाएं अन्यत्र शिफ्ट करने के लिए कहा गया है।
लीलाधर व्यास, मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी।