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सरकारी अभिलेखों में नहीं बदला बीफ गांव का नाम

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सरकारी मशीनरी के उपेक्षापूर्ण रवैये के चलते छह साल बीतने के बाद भी यमुनोत्री धाम के आखिरी प्रमुख पड़ाव जानकीचट्टी से लगे बीफ गांव का नाम सरकारी अभिलेखों मे नारायण पुरी दर्ज नहीं हो सका है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।
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दरअसल यमुनोत्री धाम के निकट बीफ गांव का नाम धार्मिक आस्था के लिहाज से बदलने को लेकर गांव के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष स्व. राजेंद्र सिंह रावत ने बर्ष 1997 मे भारत सरकार से पत्राचार शुरू किया था। अंग्रेजी भाषा में बीफ का अर्थ गोमांस होने के कारण ग्रामीण लंबे समय से इस नाम को बदलने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों ने गांव के ऊपर स्थित प्राचीन नारायण मंदिर के नाम पर गांव का नाम नारायण पुरी रखने की मांग की थी। वर्ष 2007 मे क्षेत्र पंचायत सदस्य अरविंद रावत ने इस पत्राचार को आगे बढ़ाया, जिसके चलते वर्ष 2014 राज्यपाल की ओर से स्वीकृति मिलने पर बीफ गांव का नाम बदलकर नारायणपुरी करने का शासनादेश जारी हो गया था। लेकिन अभी तक सरकारी दस्तावेजों में गांव का नया नाम दर्ज नहीं किया गया है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य अरविंद रावत ने बताया कि कई बार प्रशासन को पत्र लिखने के बाद अभी तक सिर्फ खतौनी में ही नाम बदला गया है। बाकी सभी सरकारी अभिलेखों में अभी भी पुराना नाम बीफ गांव ही चल रहा है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई कर सरकारी अभिलेखों में नारायणपुरी नाम दर्ज करवाने की मांग की है।
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