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सेब के बगीचों को तहस-नहस कर रहे भालू

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मौसम की मार के बाद सेब की फसल भालू बर्बाद कर रहे हैं। भालू सेब व बगीचों को तहस-नहस कर रहे हैं। काश्तकारों ने शासन-प्रशासन से समस्या के निराकरण की मांग की है।
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बीते एक माह से भालू रात के समय छोलमी, बगोरी, धराली, मुखबा, सुक्की, झाला में सेब के बगीचों में पहुंचकर सेब खाने से ज्यादा साथ पेड़ों को तहस-नहस कर रहे हैं। हर्षिल के वन सरपंच माधवेंद्र रावत ने बताया कि भालू के हमले से करीब दस फीसदी फसल नष्ट हो चुकी है। बताया कि झाला और सुक्की में तोते भी सेब की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। काश्तकार नटवर सेमवाल, मोहन सिंह राणा, महेश पंवार ने बताया कि भालुओं के सेब की टहनियों और छाल फाड़ने से पेड़ हमेशा के लिए बर्बाद हो रहे हैं। एक पेड़ के फल देने लायक बनने में 10 से 15 साल लग जाते हैं। ऐसे में सेब के पेड़ों को क्षति पहुंचने से उनके समक्ष आजीविका का संकट बढ़ता जा रहा है। उन्होंने वन विभाग के साथ यूएनडीपी के सहयोग से संचालित सिक्योर हिमालय परियोजना के माध्यम से काश्तकारों की आजीविका के लिए संकट बने भालुओं के हमले से निजात दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
ऐसी कोई शिकायत क्षेत्रीय अधिकारी व कर्मचारियों को मिली है, तो उसे चेक कराया जा जाएगा। काश्तकारों की सेब की फसल और बगीचों को बचाने के लिए पेट्रोलिंग समेत आवश्यक उपाय किए जाएंगे।
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पुनीत तोमर, डीएफओ, उत्तरकाशी वन प्रभाग।
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