आपदा की छाया से बाहर निकलकर इस बार यात्रा सीजन से उम्मीद जगने लगी हैं। उत्तरकाशी सहित आसपास के प्रमुख यात्रा पड़ाव वाले अधिकांश होटल मई से लेकर 15 जून तक एडवांस में बुक हो चुके हैं। आपदा के बाद बीते साल यमुनोत्री और गंगोत्री यात्रा व्यवसाय महज तीस प्रतिशत ही आंका गया।
इस वर्ष दोनों तीर्थधामों को जाने वाली सड़कें ठीक होने के साथ ही खरसाली, मुखबा तथा गंगोत्री में धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने से तीर्थ यात्रा को पंख लगने की उम्मीद है। होटलों की अग्रिम बुकिंग तथा पूछताछ का सिलसिला जारी है।
होटल व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि विभाग तथा शासन स्तर पर मनमाने ढंग से बनी अव्यवहारिक नीतियों के कारण इस बार बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों को लौटना पड़ा।
होटल व्यवसायी अजय पुरी, दीपेंद्र पंवार, राजेंद्र पंवार आदि का कहना है कि गोमुख ट्रैक पर जाने के लिए फरवरी-मार्च से ही पर्यटकों की पूछताछ शुरू हो जाती है।
इस बार उन्हें अप्रैल में भी ट्रैक पर जाने की अनुमति नहीं मिली। दरअसल पर्यटन को यात्रा से जोड़कर देखने और उसी आधार पर इसकी समीक्षा गलत है। पर्यटन एवं तीर्थाटन दोनों अलग विषय हैं। इस साल सात से 15 मई तक खरसाली में मुरारी बापू की कथा से यात्रा व्यवसाय को काफी फायदा पहुंचा है। इसी वजह से मई और 15 जून तक तो पेशेवर होटल व्यवसायियों के होटल बुक हो चुके हैं।