राजकीय पालीटेक्निक से हटाए गए संविदा कर्मियों ने सरकार पर झूठा आश्वासन देने व वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि धामी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में संविदा शिक्षकों की सेवा बहाली का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन तीन माह से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है।
संविदा शिक्षक दिनेश नौटियाल, हनुमंत बिष्ट, महेश भट्ट, प्रदीप जोशी ने कहा कि करीब 200 पालीटेक्निक संविदा शिक्षकों को सरकार ने बिना किसी लिखित आदेश और कारण के हटा दिया था, जिससे संविदा शिक्षकों को लगातार बेरोजगारी का सामना करना पड़ रहा है। संविदा शिक्षकों ने कई बार मुख्यमंत्री, मंत्री, विभागीय अधिकारियों से मुलाकात कर समस्या के समाधान के लिए ज्ञापन दिए, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। हटाए गए संविदा शिक्षकों ने जल्द समायोजन न किए जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।