उत्तरकाशी। आपदा के दौर में उपला टकनौर क्षेत्र से समर्थन मूल्य पर हुई सेब की खरीद ने सरकार की अदूरदर्शी नीति की पोल खोलकर रख दी है। गढ़वाल मंडल विकास निगम को 30 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा गया सेब महज पांच पैसे प्रति किलो की दर से बेचना पड़ा। अब निगम के अधिकारी तो किसी तरह इस बवाल से पिंड छूटने पर खुश नजर आ रहे हैं, लेकिन समर्थन मूल्य पर सेब बेचने के बावजूद काश्तकार बड़ी मेहनत से तैयार सेब की फसल को यूं बर्बाद होते देख खासे खिन्न हैं।
जून की आपदा में गंगोत्री हाईवे तबाह होने पर उपला टकनौर क्षेत्र में सेब की फसल के बगीचों में ही सड़ने का संकट खड़ा हो गया था। सरकार ने 30 रुपये प्रति किलो समर्थन मूल्य पर जीएमवीएन से 16333.51 क्विंटल सेब की खरीद कराई। किसी ने यह नहीं सोचा कि इस सेब को कहां स्टोर करेंगे और इसका क्या करेंगे? सड़क खुलने पर 21 सितंबर को देहरादून में बैठकर बिना ग्रेडिंग के ही इस सेब की 14 रुपये किलो की दर से नीलामी कर दी गई। खरीददार ने भी 30 अक्तूबर तक इसमें से ‘ए’ ग्रेड का करीब 4600 क्विंटल सेब उठाकर हाथ खड़े कर दिए।
शेष बचा करीब 11,500 क्विंटल सेब उपला टकनौर क्षेत्र में लोगों के घर-होटलों में बनाए गए गोदामों में सड़ गया। इन गोदामों की सफाई गले पड़ती देख निगम को यह सारा सेब महज 60 हजार रुपये में नीलाम करना पड़ा। ऐसे में 30 रुपये की दर से खरीदा गया यह सेब महज पांच पैसे की दर से बिका। निगम के अधिकारी इसी से खुश हैं कि अब खरीददार गोदाम खाली कर देंगे।
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सेब भंडारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने से अस्सी फीसदी से अधिक सेब गोदामों में ही सड़ गया। करीब पांच करोड़ में खरीदे गए सेब की नीलामी से 65 लाख रुपये वसूल हुए। सड़ रहे सेबों से खराब हो रहे गोदाम खाली कराने जरूरी थे। इस बार की आपदा और सेब खरीद का अनुभव भविष्य के लिए सबक है।
धनंजय असवाल, सहायक महाप्रबंधक जीएमवीएन
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आपदा में उपजे हालात को समझने में सरकार पूरी तरह नाकाम रही। व्यवस्थित ढंग से सेब का भंडारण होता और फल प्रसंस्करण द्वारा इससे पल्प तैयार किया जाता तो यह खरीद घाटे के बजाय फायदे का सौदा साबित होती। सरकार के अधिकारियों ने इस बारे में लोगों से राय मशविरा तक नहीं किया।
डा. नागेंद्र रावत, सेब काश्तकार हर्षिल
भविष्य के लिए ये उपाय जरूरी
उत्तरकाशी। आपदा के दौर में इस बार हुई सेब की बर्बादी से भविष्य में सबक लेने की जरूरत है। क्षेत्र के जागरूक लोगों का कहना है कि आपदा के दौर में सड़क शीघ्र खुलवाने की व्यवस्था होनी चाहिए। क्षेत्र में सेब, आलू आदि के भंडारण के लिए कोल्ड स्टोर बनाया जाना चाहिए। फल प्रसंस्करण की यूनिट लगे तो सेब से उत्पाद तैयार कर न सिर्फ मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी जुटाए जा सकते हैं।