मोरी (उत्तरकाशी)। गोविंद वन्य पशु विहार क्षेत्र में मौजूद ओसला, गंगाड़, पवांणी व ढाटमीर गांवों के लोग आजतक सड़क से नहीं जुड़ पाए हैं, जिससे ग्रामीणों को तालुका में स्थित नजदीकी मोटर मार्ग तक पहुंचने के लिए 17 किमी तक का पैदल सफर तय करना पड़ता है।
गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए सियागाड़ में पार्क प्रशासन की ओर से बनाई गई पुलिया भी घटिया गुणवत्ता के कारण जर्जर बनी है। क्षेत्र के बचन सिंह, राजेंद्र सिंह, सुरेश कुमार ने बताया कि सड़क की मांग को लेकर ग्रामीणों ने वर्ष 2008 में सड़क के एलाइनमेंट में आ रहे पेड़ों को काटने का आंदोलन चलाया था, लेकिन प्रशासन ने मांगों पर कार्रवाई करने के बदले उल्टा 265 ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा किया। वहीं 2016 में ग्रामीणों ने एक बार फिर से आंदोलन किया, जिसके बाद सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत करीब 15 करोड़ की लागत से सौड़-ओसला मोटर मार्ग के निर्माण को स्वीकृति दी, लेकिन स्थानीय स्तर पर वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई नहीं होने से आजतक 28 किमी लंबी सड़क का निर्माण नहीं हो सका। नकदी फसलों को बाजार तक पहुंचाने के लिए 500 रुपये तक में खच्चर ढुलान कराना पड़ता है। गोविंद वन्य पशु विहार के उप निदेशक आरपी मिश्रा का कहना है कि सौड़ से ओसला गांव तक के 28 किमी लंबे मोटर मार्ग के लिए राष्ट्रीय वन्यजीव सलाहकार परिषद् एवं भारत सरकार की स्टैंडिंग कमेटी ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। वर्तमान में वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई चल रही है।