मोरी (उत्तरकाशी)। संचार, बैंकिंग, बिजली, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में सरकारी उदासीनता के बावजूद जिले में सांकरी हरकीदून घाटी साल में दस माह पर्यटकों से गुलजार रहती है। यह स्थिति कुछ स्थानीय युवाओं की कड़ी मेहनत, पेशेवर नजरिया अपनाने और उत्तराखंड की मेहमानों की जमकर आवभगत की संस्कृति का अनुसरण करने के कारण संभव हो पाया है। क्षेत्र में स्थानीय सहित देशभर में पंजीकृत 56 टूर ऑपरेटर तथा 45 कंपनियां कार्य कर रही हैं।
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षित और वर्षों के अनुभव से पर्यटन व्यवसाय की बारीकियों में पारंगत सांकरी में हरकीदून प्रोटेक्शन एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन चलाने वाले चैन सिंह एवं भगत सिंह बीते कई सालों से क्षेत्र के 22 ट्रेक रूट पर पर्यटकों के ग्रुप ले जा रहे हैं। उनके साथ ही भरत सिंह आदि टूर ऑपरेटर यहां ट्रैकिंग के अलावा रॉक क्लाइंबिंग, रैपलिंग, पैरासेलिंग, स्कीइंग, वाईल्ड लाइफ सफारी और सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराने के साथ ही अब बुग्यालों में ध्यान व योग की ओर भी पर्यटकों को आकर्षित करने का काम कर रहे हैं। क्षेत्र में हर साल 25 से 30 हजार पर्यटक पहुंच रहे हैं। क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय को मजबूत आधार देने में जुटे चैन सिंह रावत कहते हैं कि सांकरी ही नहीं अब वे उत्तरकाशी व ऋषिकेश से भी टूर ऑपरेट करने लगे हैं। क्षेत्र में अकेले 90 परिवारों वाले सांकरी गांव के ही साठ परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन पर्यटन बन गया है। ग्रामीण इसके साथ ही सेब की बागवानी भी करते हैं, लेकिन पर्यटन को ये लोग शीर्ष प्राथमिकता देते हैं।
समस्याओं को लेकर क्षेत्र के पर्यटन व्यवसायियों का कहना है कि सांकरी गांव होम स्टे के लिए 15 घर तैयार हैं, लेकिन पर्यटन विभाग ने अभी तक उन्हें पंजीकृत नहीं करके सरकारी प्रोत्साहन से वंचित रखा है। संचार जैसी जरूरी सुविधा के लिए पर्यटकों को कई बार 36 किमी नीचे जरमोला की दौड़ लगानी पड़ती है। घाटी में चिकित्सकों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं भी बदहाल हैं। बिजली भी यहां सुचारु नहीं है। बैंकिंग सुविधा के लिए 50 किमी दूर पुरोला की दौड़ लगानी पड़ती है। नैटवाड़ के बैंक में तो नेटवर्क नहीं होने के कारण एक साल से लोगों के खातों में जमा-निकासी की इंट्री तक नहीं हुई है। सांकरी में वाहन पार्किंग व कैंप साइट भी विकसित नहीं हुई। बाहरी कंपनियों को मिली खुली छूट के कारण पर्यटन व्यवसाय पर कब्जा जमाने की होड़ से पर्यटन का स्वरूप बिगड़ने और इसके दूरगामी असर से स्थानीय लोग आशंकित हैं।
हरकीदून क्षेत्र के लिए 38 कंपनियां पंजीकृत हैं। होम स्टे की 36 फाइलें अभी लंबित हैं। बाहर की टूर ऑपरेटर कंपनियों को पंजीकरण से इंकार नहीं कर सकते।
प्रकाश खत्री, जिला पर्यटन अधिकारी उत्तरकाशी।