उत्तरकाशी। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही दर्जनों संस्थाओं के बीच 61 साल के प्रताप पोखरियाल अपने बलबूते पर पर्यावरण बचाने का बीड़ा उठा रहे हैं। पर्यावरण के प्रति उनका प्रेम व जुनून ही है कि 1980 से लेकर आजतक उन्होंने जिले में करीब 150 हेक्टेयर भूमि पर 15 लाख से अधिक पेड़ पौधे पनपाए हैं।
भैंत गांव में 1958 में प्रताप पोखरियाल का जन्म हुआ था। जहां उनके माता पिता रामपति देवी व श्याम सिंह पोखरियाल गांव में ही पशुपालन का कार्य करते थे। पशुओं को चराते वक्त उनके माता पिता पैदल रास्ते में उगे पौधों को हटाकर गांव की खाली भूमि पर लगा देते थे। ताकि वह किसी के पैर से कुचलकर नष्ट न हों। यहीं से प्रताप के मन में पर्यावरण के प्रति प्रेम विकसित होने लगा। हालांकि कुछ दिक्कतों के चलते उन्होंने कक्षा पांच तक की पढ़ाई के बाद स्कूल छोड़ना पड़ा, जिसके बाद 14 साल की उम्र में रोजगार की तलाश में वह ऋषिकेश गए। जहां उन्होंने मोटर मेकैनिक का कार्य सीखा। वर्ष 1980 में उन्होंने उत्तरकाशी लौटकर मोटर मेकैनिक की दुकान खोली, लेकिन पर्यावरण के प्रति अपने प्रेम के चलते वह रोजना खाली समय में वरूणावत की तलहटी में पौधा रोपण व उनकी देखभाल करने लगे। वहीं समाज में पर्यावरण को लेकर जागरूकता लाने के लिए 1998 में उन्होंने मैती आंदोलन की शुरूआत की। वर्ष 2002 में अपने पिता की याद में उन्होंने वरूणावत पर्वत की तलहटी पर श्याम स्मृति वन विकसित किया।
इस बीच उन्होंने अपने पैतृक गांव में भी करीब 100 हेक्टेयर मिश्रित वन तैयार किया। ग्रामीणों ने उन्हें 2003 से 2016 तक निर्विरोध वन सरपंच बनाया। इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें तीन बार वन पंचायत पुरस्कार व अमेरिका के बौसटन विवि सहित कई अन्य संस्थानों ने भी उन्हें पुरस्कृत किया। प्रताप पोखरियाल ने कहा कि पर्यावरण व समाज की सेवा करना ही उनके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है।