चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शिक्षा प्रकल्प विद्या भारती से संचालित चिन्यालीसौड़ का सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज शक्तिपुरम मेधावियों की खान साबित हो रहा है। इस वर्ष भी उत्तराखंड बोर्ड हाईस्कूल की मैरिट में इस विद्यालय के दो व इंटरमीडिएट में छह मेधावियों ने जगह बनाई। वर्ष 2002 में हाईस्कूल की मान्यता मिलने के बाद से अब विद्यालय से 95 मेधावी हाईस्कूल और 45 इंटरमीडिएट की मैरिट सूची में स्थान पा चुके हैं। इस वर्ष तो 12वीं की परीक्षा में विद्यालय की शताक्षी तिवारी ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है।
वर्ष 1979 में शक्तिपुरम चिन्यालीसौड़ में सरस्वती शिशु मंदिर की स्थापना हुई और बाद के वर्षों में यहां जूनियर एवं माध्यमिक कक्षाएं भी शुरू हुईं। वर्ष 2002 में इस विद्यालय से हाईस्कूल और 2005 में इंटरमीडिएट का पहला बैच निकला। अभी तक विद्यालय के 95 छात्र-छात्राएं हाईस्कूल और 45 इंटरमीडिएट की मैरिट सूची में स्थान बना चुके हैं। इस वर्ष विद्यालय की शताक्षी तिवारी ने राज्य में प्रथम स्थान हासिल कर अपने विद्यालय का नाम रोशन किया। उसके साथ ही पांच अन्य मेधावियों ने इंटरमीडिएट ओर दो विद्यार्थियों ने उम्दा अंक हासिल कर हाईस्कूल की मैरिट सूची में जगह बनाई।
प्रधानाचार्य नत्थीलाल बंगवाल बताते हैं कि वर्तमान में इस विद्यालय में छात्र संख्या 1400 है। इस बार 167 बच्चों ने हाईस्कूल और 131 ने इंटरमीडिएट की परीक्षा दी और सभी उत्तीर्ण हुए। देहरादून आदि बड़े शहरों में महंगी शिक्षा की तुलना में विद्यालय में महज 500 से 700 रुपये प्रतिमाह शुल्क होने के कारण क्षेत्र के मध्यम वर्ग के परिवार भी बड़े शहरों की ओर पलायन करने के बजाय यहीं रहकर अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं। विद्यालय के 157 छात्र-छात्राएं 80-80 हजार रुपये की इंस्पायर स्कॉलरशिप लेकर उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
मेधावियों के लिए प्रधानाचार्य ने की कड़ी मेहनत
चिन्यालीसौड़। 18 वर्षों से निरंतर बड़ी संख्या में मेधावी तैयार करने के पीछे विद्यालय के प्रधानाचार्य नत्थीलाल बंगवाल की अहम भूमिका है। वे बताते हैं कि वर्षभर प्रशिक्षित आचार्यों द्वारा कक्षाओं में अध्यापन करने के साथ ही रोजाना तीन से चार घंटे अतिरिक्त कक्षाएं भी संचालित की जाती हैं। इसके अलावा उनका मुख्य फोकस सतत मूल्यांकन पर रहता है। इससे बच्चों की कमियों का पता लगाकर उसमें तत्काल सुधार किया जाता है। इसी योग्यता के आधार पर विद्या भारती ने उन्हें प्रांत निरीक्षक की जिम्मेदारी भी सौंपी है। वे प्रदेश के विभिन्न विद्या मंदिरों का दौरा कर वहां भी शिक्षा के स्तर एवं गुणवत्ता सुधार की मुहिम में जुटे हैं और इसमें सफलता भी मिल रही है। प्रधानाचार्य बंगवाल बताते हैं कि बीते 17 वर्षों में इस विद्यालय के मेधावियों ने मैरिट में दूसरे से 25वें तक स्थान हासिल किए थे, लेकिन कोई अव्वल नहीं आया था। इस बार उन्होंने छात्र-छात्राओं, आचार्यों और अभिभावकों से गुरु दक्षिणा में मैरिट में प्रथम स्थान मांगा था। इसके लिए उन्होंने प्रथम स्थान हासिल करने वाले मेधावी को अपनी ओर से 25 हजार रुपये नकद पारितोषिक देने की घोषणा की थी। उनके पुत्र अजय शंकर बंगवाल ने भी इसी विद्यालय से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मैरिट सूची में स्थान प्राप्त किया था। वर्तमान में वह आईआईटी से रॉ मैटीरियल साइंस में रिसर्च कर रहा है।