बड़कोट (उत्तरकाशी)। यमुनोत्री धाम की यात्रा पर पहुंचने वाले तीर्थयात्रियों को धाम के अंतिम पड़ाव जानकीचट्टी में जोखिम के साथ यमुना नदी में स्नान करना पड़ेगा। आपदा से क्षतिग्रस्त हुए घाटों का पुनर्निर्माण तो दूर पर्यटन विभाग ने अभी तक इसका कोई प्रस्ताव भी तैयार नहीं किया है, जिससे यात्रा कारोबारियों और तीर्थ पुरोहितों में रोष है।
जानकीचट्टी में ग्राम पंचायत ने खाली पड़ी जमीन को पार्किंग के तौर पर विकसित किया और पर्यटन विभाग ने पार्किंग के पिछले हिस्से में यमुना किनारे स्नान घाट का निर्माण कराया था। बीते साल 16 जुलाई को अतिवृष्टि से घाट तबाह हो गए थे। क्षेत्र के अरविंद रावत, एलम सिंह रावत, तीर्थ पुरोहित मनमोहन उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल का कहना है कि घाट की तो अभी तक सुध ही नहीं ली है। जिला पर्यटन अधिकारी प्रकाश खत्री का कहना है कि जानकीचट्टी में यमुना नदी के उफान से स्नान घाट क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दो दिन पहले ही मिली है। इस दिखवाया जा रहा है।