उत्तरकाशी। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के सिक्योर हिमालय प्रोजेक्ट के तहत हर्षिल क्षेत्र में बागवानी की तस्वीर चमकाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रोजेक्ट के तहत हिमालयन एक्शन रिसर्च सेंटर (हार्क) के विशेषज्ञों ने क्षेत्र के बागवानों के बीच सर्वे कर जैविक सेब उत्पादन एवं वैल्यू चेन प्रमोशन की संभावनाएं टटोलीं।
बर्फ से ढके उपला टकनौर के गांवों में पहुंचे हार्क के विशेषज्ञों ने यहां सेब काश्तकारों से मुलाकात की। काश्तकारों ने बागवानी एवं विपणन में आ रही दिक्कतें हार्क के प्रतिनिधियों से साझा कीं। सर्वे में निष्कर्ष निकला कि यहां बागीचे पुराने हो चुके हैं। नई एवं उन्नत किस्म की पौध के लिए बागवान हिमाचल पर निर्भर हैं। यहां बगीचों में परागण किस्म के पेड़ों की संख्या कम है। साथ ही पौध रोपण, कटाई-छंटाई तथा उर्वरक एवं कीटनाशक दवाओं के छिड़काव का किसानों को पूरा ज्ञान नहीं है। जंगली जानवर फलों के साथ ही सेब के पेड़ों की छाल चट कर इन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सेब काश्तकार सचेंद्र पंवार, दुर्गेश पंवार, उमेश पंवार, मोहन सिंह राणा, माधवेंद्र रावत ने बागवानी को बढ़ावा देने के लिए किसानों को बाहरी सेब उत्पादक क्षेत्रों में एक्सपोजर विजिट कराने, किसानों को बागवानी का ज्ञान देने, बागवानी में आ रही समस्याओं के निस्तारण के लिए क्षेत्र तक विशेषज्ञों की पहुंच सुनिश्चित करने और आधुनिक विधि के प्रशिक्षण की मांग की। उन्होंने जंगली जानवरों से बगीचों की सुरक्षा के लिए सोलर फेंसिंग कराने पर जोर दिया। किसानों ने विपणन में आ रही दिक्कतें भी साझा कीं। सर्वे टीम ने इन मुद्दों को लेकर डीएम डा.आशीष चौहान एवं गंगोत्री विधायक गोपाल रावत से भी मुलाकात की।
यूएनडीपी को सौंपेंगे विस्तृत रिपोर्ट
उत्तरकाशी। हार्क की सर्वे टीम के प्रमुख शैलेष पंवार ने बताया कि सर्वे में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। क्षेत्र में बागवानी को बढ़ावा देने और इसमें विविधता लाकर किसानों के लिए अधिक फायदेमंद बनाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत है। किसानों से मिली जानकारी के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर यूएनडीपी को सौंपी जाएगी। सर्वे टीम में डा. सुहासिनी, अतुल नौटियाल, सेब विज्ञानी उमेश कुमार, जगदंबा, जसवंत, आशीष, सौम्या, प्रवेंद्र और यूएनडीपी के प्रतिनिधि रोहित गुसाईं शामिल थे। ब्यूरो