उत्तरकाशी। गंगा नदी को स्वच्छ एवं निर्मल करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बार फिर से करोड़ों की योजनाएं स्वीकृत की हैं। नमामि गंगे के तहत स्वीकृत योजनाओं के दम पर सरकार ने मार्च 2020 तक गंगा को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त करने का दावा किया है।
गंगोत्री ग्लेशियर के मुहाने गोमुख से करीब चार किमी दूर स्थित भोजवासा क्षेत्र से ही मां गंगा प्रदूषित होने लगती है। गंगोत्री धाम में स्थित होटलों, आश्रमों का कचरा व मलमूत्र गंगा भागीरथी में जाता है। गौरी कुंड के ऊपर बने चैंबर व भागीरथी शिला के ऊपर से गुजरती सीवर लाइन में कई बार लीकेज होने से सारी गंदगी नदी में जा रही है। उधर, जनसंख्या वृद्धि का दबाव झेल रहे जिला मुख्यालय में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट होने के बावजूद हालत में कोई बदलाव नहीं है। नमामि गंगे की सदस्य शांति ठाकुर का कहना है कि गंगोत्री धाम से आगे गोमुख व तपोवन क्षेत्र में मानवीय गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगना चाहिए। संत स्वामी सुंदरानंद का कहना है कि सरकार को आस्था व पर्यावरणीय पहलुओं को देखते हुए योजनाएं बनानी चाहिए।
गंगोत्री धाम में कुल 154 भवनों में से 124 को सीवर लाइन से जोड़ दिया गया है। बचे हुए 30 भवनों को लाइन से जोड़ने के लिए साढ़े तीन करोड़ का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। उत्तरकाशी नगर में वर्तमान में करीब 12 किमी का सीवर नेटवर्क है। गंगा नगर योजना में शामिल उत्तरकाशी व चिन्यालीसौड़ में वृहद स्तर पर सीवर ट्रीटमेंट किया जाना है।
- शशि राणा, प्रोजेक्ट मैनेजर, गंगा प्रदूषण विभाग।
सीवर लाइनों व ट्रीटमेंट प्लांट के विस्तारीकरण के लिए प्रशासन ने योजनाएं तैयार कर शासन को भेजी हैं। स्थायी डंपिंग जोन के लिए भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण कूड़ा निस्तारण में कुछ समस्याएं आ रही हैं, जिसका समाधान करने के लिए संबंधित विभागों के साथ कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
- डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी, उत्तरकाशी।