उत्तरकाशी। कोलकाता से पहुंचे पर्यटक दल के स्वागत में ग्रामीणों ने बर्फबारी को उत्सव का रूप दे डाला। भारी बर्फबारी के बीच ग्रामीणों के स्वागत सत्कार से पर्यटक अभिभूत नजर आए।
क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने की मुुहिम में जुटी हरकीदून प्रोटेक्शन एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन ने इस बार हो रही भीषण बर्फबारी को आफत के बजाय वरदान के तौर पर स्वीकारने का निर्णय लिया है। एसोसिएशन के सचिव चैन सिंह रावत की पहल पर विगत 27 जनवरी को सांकरी पहुंचे कोलकाता के नौ सदस्यीय पर्यटक दल का यहां ग्रामीणों ने ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया। अगले दिन ये पर्यटक जखोल गांव पहुंचे। यहां सोमेश्वर महादेव के मेले का आयोजन किया गया, जिसमें शामिल होकर पर्यटकों ने भरपूर लुत्फ उठाया। इन पर्यटकों को घरों में ठहराकर ग्रामीणों को होम स्टे को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया।
अगले दिन यह पर्यटक दल खन्यासणी गांव पहुंचा। यहां उन्होंने बर्फ से ढके मैदान में कैंपिंग का लुत्फ लिया। इसके बाद ये पर्यटक भीतरी गांव होते हुए सरताल तक ट्रैकिंग कर खन्यासणी गांव लौटे। बीते बृहस्पतिवार को खन्यासणी गांव स्थित प्राचीन नंदेश्वर शेडकुडिया महासू देवता के मंदिर में इन पर्यटकों के स्वागत में उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें शामिल हुए ग्रामीणों ने पारंपरिक लोकगीत एवं नृत्यों के माध्यम से क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति की झलक प्रस्तुत कर बर्फबारी को उत्सव का रूप दे दिया।
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कौतूहल पैदा करता है बर्फबारी का उत्सव
उत्तरकाशी। कोलकाता से आए साक्षर, ऋत्विक, सतातत्रु घोष, अंकुर घोष, सारती, संजनी आदि पर्यटकों ने कहा कि इस क्षेत्र की संस्कृति और मेहमान नवाजी अनूठी है। भीषण बर्फबारी के बीच भी ग्रामीणों का उत्साह और जज्बा देखने लायक था। मैदानी क्षेत्रों से आने वाले लोग जहां थोड़ी देर के लिए बर्फ से रास्ता अवरुद्ध होने पर ही परेशान हो रहे हैं, वहीं बर्फ में कैद होने के बावजूद ग्रामीण उत्सव मना रहे हैं। यह देखना कौतूहल पैदा करता है।
खेती-बागवानी के साथ ही पर्यटन के लिए भी वरदान है बर्फबारी
उत्तरकाशी। हरकीदून माउंटेनियरिंग एसोसिएशन के सचिव चैन सिंह रावत, ज्ञान सिंह कुंवर, विजय, उमेश, बृजमोहन आदि ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पूर्व भी क्षेत्र में भारी बर्फबारी होती थी। तब भी ग्रामीण अपने 3-4 माह का राशन घरों में एकत्र कर सुकून की जिंदगी जीते थे। कई सालों बाद हुई भारी बर्फबारी वरदान के रूप में हुई है। इससे जहां खेती बागवानी को फायदा मिलेगा वहीं आने वाले दिनों में यह पर्यटन के लिए भी संजीवनी साबित होगी। इसी खुशी को देखते हुए ग्रामीण आजकल बर्फबारी को उत्सव के रूप में मना रहे हैं।