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निवेशकों के रुझान और केंद्र पोषित योजना से जिले में बागवानी विकास की उम्मीद

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उत्तरकाशी। विश्व बैंक की मदद से उत्तराखंड में औद्यानिकी विकास की 700 करोड़ रुपये की योजना व बीते अक्तूबर में हुए इन्वेस्टर समिट में आए प्रस्ताव यदि प्रभावी ढंग से धरातल पर उतरे, तो जनपद में बागवानी की तस्वीर बदल सकती है।
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बीते साल ही जिले में 15,196.34 हेक्टेयर में पनपे बागानों से 26,978.64 मीट्रिक टन फलों का उत्पादन हुआ। इसमें आधे से ज्यादा क्षेत्रफल और फल उत्पादन सेब का ही है। जिले में 8955 हेक्टेयर में पनपे सेब बागानों में बीते साल 15,745 मीट्रिक टन सेब उत्पादन हुआ। वह भी तब जब यहां अधिकांश बागीचों में सेब की पारंपरिक किस्में लगी हैं। फल पौध के लिए जिले के किसान हिमाचल पर निर्भर हैं। हाईटेक बागवानी के अभाव में अभी तक जिले में बागवानी को संभावित बढ़ावा नहीं मिल पा रहा है।
केंद्र सरकार ने विश्व बैंक की मदद से उत्तराखंड में औद्यानिकी विकास के लिए 700 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की है। साथ ही बीते अक्तूबर में देहरादून में हुई इन्वेस्टर समिट में कुछ कंपनियों ने उत्तराखंड में फल पौध नर्सरी के क्षेत्र में निवेश की इच्छा जताई है। जिले के उद्यान विभाग ने फरीदाबाद हरियाणा की फ्रेंको कंपनी को 39 हेक्टेयर में पसरे अपने रैथल और बालचा राजकीय उद्यानों में फल पौध नर्सरी तैयार करने के लिए आमंत्रित किया है।
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इन्वेस्टर समिट में हरियाणा की फ्रेंको कंपनी ने नर्सरी के क्षेत्र में पांच करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव दिया है। कंपनी को उद्यान विभाग के रैथल व बालचा उद्यान में फल पौध नर्सरी तैयार करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
एनके सिंह, सहायक उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी।
औद्यानिकी विकास योजना में हाईटेक बागवानी, मार्केट लिंकेज, कोल्ड स्टोर, टिशु कल्चर लैब आदि पर काम हो, तो अब तक अछूते रहे क्षेत्रों में भी बागवानी को बढ़ावा देकर ज्यादा किसानों का फायदा पहुंचाया जा सकता है। इसमें क्लस्टर एप्रोच के आधार पर विभिन्न बागवानी फसलों का विकास किया जाना जरूरी है।
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डा. पंकज नौटियाल, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़।
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