उत्तरकाशी। नगर पालिका बाड़ाहाट में कूड़ा डंपिंग जोन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। यूं तो पालिका प्रशासन ने कूड़ा निस्तारण के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, लेकिन इन सभी अड़चनों के बीच योजनाओं को धरातल में उतारना संभव नहीं है। ऐसे में कूड़े की विकराल समस्या से निपटने के लिए प्रशासन को ठोस योजना के साथ ही जनसहयोग की जरूरत है।
नगर पालिका बाड़ाहाट में रोजाना करीब 4 से 5 टन तक कूड़ा जमा होता है। नगर का सारा कूड़ा तेखला गदेरे में डंप किया जाता था, लेकिन विगत एक नवंबर को हाईकोर्ट की पाबंदी व लोगों द्वारा नए डंपिंग जोन के लिए भूमि नहीं देने से अब पालिका प्रशासन के लिए टनों कूड़े को निस्तारित करना चुनौती बन गया है। उधर, पर्यावरण मंत्रालय के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन कानून के तहत कूड़ा डंपिंग जोन को नदियों से 100 मीटर तथा आबादी व अन्य जलस्रोत से करीब 200 मीटर दूर ही बनाया जा सकता है। ईको सेंसिटिव जोन आदि संरक्षित क्षेत्रों में डंपिंग जोन बनाना पूर्णत: वर्जित है। ऐसे में गंगा नदी, वन क्षेत्र व ईको सेंसिटिव जोन से घिरी नगर पालिका में मानकों के अनुसार कूड़ा निस्तारण करना समस्या बन गया है। हालांकि नियमों के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में री-साइकिलिंग प्लांट व जैविक कूड़े को खाद बनाने के लिए पिट बनाया जा सकता है।
पर्यावरण मंत्रालय के मानकों के तहत नगर पालिका क्षेत्र में डंपिंग जोन बनाना बड़ी चुनौती है। हालांकि प्रशासन ने मानकों के अनुसार कुछ स्थान चयनित किए हैं, जहां कॉमपेक्टर मशीन, री-साइकिलिंग प्लांट व पिट खोदकर जैविक अजैविक कूड़े को निस्तारित किया जा सकता है। भूमि हस्तांतरित होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- देवेंद्र नेगी, नगर पालिका प्रशासक व एसडीएम भटवाड़ी।