उत्तरकाशी। नगर पालिका बाड़ाहाट में कचरा निस्तारण के ठोस इंतजामों का अभाव निकाय चुनावों में बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है। कई दशकों बाद भी नगर में कचरा निस्तारण के लिए स्थायी ट्रेंचिंग ग्राउंड तक नहीं बनाया जा सका है। अब नए परिसीमन में विस्तार के बाद तो यह समस्या और गहराना तय है। लोगों का कहना है कि उसी प्रत्याशी को वोट देंगे, जो उन्हें तेखला गदेरे से कचरा डंपिंग जोन हटाने की गारंटी देगा।
वर्ष 1958 में अस्तित्व में आयी नगर पालिका बाड़ाहाट उत्तरकाशी बदलते समय के साथ काफी फैल चुकी है। गंगा घाटी के अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पलायन कर लोग जिला मुख्यालय वाले शहर में आकर बसे हैं। यही कारण है कि आबादी के बढ़ते दबाव में विस्तार ले चुकी इस पालिका में नए परिसीमन में निकटवर्ती तिलोथ, जोशियाड़ा, लदाड़ी आदि गांव शामिल किए गए हैं। हैरानी की बात है कि छह दशक बाद भी इस नगर में कचरा निस्तारण के ठोस इंतजाम नदारद हैं। लंबे समय से यहां तेखला गदेरे में कचरा उड़ेला जा रहा है। यहां भी वैज्ञानिक ढंग से निस्तारित करने के इंतजाम नहीं होने से अधिकांश कचरा बहकर गंगा भागीरथी में जा रहा है और बाकी कूड़ा नियमों को ताक पर रखकर जलाया जा रहा है। क्षेत्रीय निवासी सुभाष भट्ट, दलवीर चौहान, अनिल चौहान, साधना, विवेक पश्चिमी आदि का कहना है कि वे लोग उसी प्रत्याशी को अपना वोट देंगे जो उन्हें तेखला गदेरे से कचरा डंपिंग जोन हटाने की गारंटी देगा।