उत्तरकाशी। पूर्व में करोड़ों की लागत से हुए ट्रीटमेंट के दौरान छोड़ी गई खामियों के चलते वरुणावत पर्वत से फिर खतरे के संकेत मिल रहे हैं। पहाड़ी के शीर्ष और मध्य भाग में मलबा जमा है। ज्ञानसू नाले के ऊपरी हिस्से में भूधंसाव बढ़ने से चीड़ के पेड़ तिरछे होने लगे हैं। बारिश से वरुणावत के इस हिस्से से लूज मलबा मैणागाड़ एवं ज्ञानसू खाले के रास्ते लोगों के घर-दुकानों में घुस गया।
केंद्र सरकार से मिले 282 करोड़ के भारी भरकम पैकेज में करीब 70 करोड़ रुपये खर्च कर वरुणावत के एक हिस्से का ट्रीटमेंट तो किया गया, लेकिन इसी हिस्से में तांबाखानी, रामलीला मैदान और मस्जिद मोहल्ला वाले सूट के साथ ही वरुणावत से निकलने वाले मैणागाड, ज्ञानसू खाला एवं पाडुली खाला वाले हिस्से की सुध नहीं ली गई। ज्ञानसू बस्ती के ऊपरी हिस्से में वन विभाग ने कुछ चैक डेम बनाने के साथ ही वानस्पतिक उपचार कराया था, लेकिन हर साल बरसात के दौरान धंसाव बढ़ने से यह उपचार कारगर साबित नहीं हुए। अब मलबा बस्ती के घर दुकानों में घुस रहा है।
वरुणावत शीर्ष से पानी की सुरक्षित निकासी का इंतजाम नहीं होने से तांबाखानी वाले हिस्से में हो रहा कटाव शीर्ष तक पहुंच गया है। इसे देखते हुए सरकार ने 6.62 करोड़ रुपये से ट्रीटमेंट की तैयारी कर ली है। ज्ञानसू बस्ती के लोगों का कहना है कि मैणागाड़ से ज्ञानसू गैस गोदाम तक की बस्ती भी खतरे की जद में है। डीएम डा. आशीष चौहान का कहना है कि ज्ञानसू बस्ती के ऊपरी हिस्से में धंसाव से खतरे की आशंका को देखते हुए वन विभाग एवं एडीएम से इसका निरीक्षण कराया जाएगा। खतरा होने पर जियोलॉजिस्ट की टीम बुलाकर इसका आंकलन कराया जाएगा और ट्रीटमेंट की योजना तैयार की जाएगी।