उत्तरकाशी। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि वर्ष 2006 में कांग्रेस सरकार ने अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पारंपरिक वनवासी कानून बनाया था, लेकिन मोदी सरकार इसका प्रभावी ढंग से अनुपालन नहीं करा रही है। इससे वनवासियों को उनके हक हकूक नहीं मिल पा रहे हैं। बृहस्पतिवार को वे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इसी कानून के अनुपालन के संबंध में पीएम मोदी को ज्ञापन देने जा रहे थे, लेकिन भाजपा सरकार ने उन्हें नहीं देने दिया।
निजी कार्यक्रम में शामिल होने उत्तरकाशी पहुंचे पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उपाध्याय ने पत्रकार वार्ता में कहा कि पहाड़ों से हो रहे पलायन का सबसे बड़ा कारण वनों पर उनके पारंपरिक अधिकारों का हनन है। इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने संसद में बाकायदा कानून पारित किया था, लेकिन वर्तमान भाजपा सरकार इसका प्रभावी अनुपालन नहीं करा पा रही है। कड़े वन कानूनों के चलते पहाड़ की जनता का मोह वनों से भंग होता जा रहा है और लोग पलायन करने को मजबूर हैं। यदि वनवासियों को जंगलों में उनके अधिकार दिए जाएं, तो इस पर काफी हद तक रोक लग सकती है। साथ ही उन्होंने वन क्षेत्रों में रहने वालों को गिरजन मानते हुए सरकारी सेवाओं में आरक्षण देने, वनवासियों को रसोई गैस सिलेंडर मुफ्त देने, ग्रीन बोनस का लाभ नेताओं के बजाय वनवासियों को देने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उन्हें प्रधानमंत्री को ज्ञापन नहीं सौंपने दिया। अब वे राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित करेंगे। इस मौके पर घनानंद नौटियाल, नवीन पैन्यूली, महावीर चौहान आदि मौजूद रहे।