बड़कोट (उत्तरकाशी)। जमदग्नि ऋषि की तपस्थली ब्रह्मपुरी थान गांव में क्षेत्र के 12 गांवों के आराध्य समेश्वर देवता के तीन दिवसीय मेले में रवाईं घाटी की समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिली। मेले में डांगरी और धनुष-बाण नृत्य को देखने के लिए ग्रामीणों की खूब भीड़ उमड़ी। ग्रामीणों ने देव डोलियों के साथ नृत्य एवं पूजा-अर्चना कर मन्नतें मांगीं।
ब्रह्मपुरी थान गांव को भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि की तपस्थली माना जाता है। गांव में हर साल क्षेत्र के आराध्य समेश्वर देवता का भव्य मेला आयोजित किया जाता है। बीते तीन दिन से थान गांव में चल रहा मेला रविवार को संपन्न हुआ। इस मौके पर डांगरी एवं धनुष-बाण नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। बचाण गांव के समेश्वर देवता के पश्वा अभिमन्यु प्रसाद को करीब सौ मीटर तक धारदार डांगरी (फरसों) के ऊपर नंगे पैर चलते देख लोग दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हुए।
मेले में शामिल होने पहुंचे सुकण गांव के ग्रामीणों ने गांव से एकत्र आटे से तैयार रोट पर धनुष बाण से निशाना साध कर क्षेत्र की समृद्ध परंपरा एवं संस्कृति का प्रदर्शन किया। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष रविंद्र चौहान, पुजारी शांति प्रसाद डिमरी, ग्राम प्रधान सुदक्षिणा डिमरी, प्रदीप, आशीष, राम प्रसाद बिजल्वाण, केंद्र सिंह चौहान, दर्मियान सिंह, मोहन सिंह पंवार आदि मौजूद रहे।