उत्तरकाशी। आधी-अधूरी तैयारियों और मौसम के पूर्वानुमान को भांपे बिना उच्च हिमालयी ट्रैकों पर कदम बढ़ाते पर्यटक अपनी जान जोखिम में डालने के साथ ही प्रशासन के लिए भी सिरदर्द बनते जा रहे हैं। इस सीजन में अभी तक जिले में उच्च हिमालयी ट्रैकों पर हुए चार हादसों में चार लोगों की मौत हो चुकी है। ये सभी घटनाएं जिले से बाहर की एजेंसियों के साथ गए ट्रैकिंग ग्रुप के साथ घटी हैं। इससे जिले के पर्यटन व्यवसाय की साख पर भी बट्टा लग रहा है।
बता दें कि जिले में दर्जनों हिमशिखरों के अलावा ट्रैकिंग के साथ पर्वतारोहण का दोहरा रोमांच देने वाले दर्जनों उच्च हिमालयी ट्रैक मौजूद हैं। इनमें गंगोत्री-कालिंदी-बद्रीनाथ, गंगोत्री-उडनकोल-केदारनाथ, झाला-धूमधारकांठी-हरकीदून, हर्षिल-लमखागा पास-छितकुल, हरकीदून-बडासू पास-छितकुल, गंगोत्री-केदारताल, जानकीचट्टी-बाली पास-यमुनोत्री पास-जानकीचट्टी, जानकीचट्टी-सुक्की आदि ट्रैक प्रमुख हैं। हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी ट्रैकर्स यहां आते हैं। पर्वतारोहण एवं ट्रैकिंग से जुड़े कारोबार पर जिले के सैकड़ों युवाओं की आजीविका टिकी है।
इस सीजन में अभी तक चांगशील, बडासू पास, बाली पास एवं केदारताल में हुए हादसों में दो ट्रैकर्स और दो पोर्टरों की मौत हो चुकी है। हाल ही में छितकुल ट्रैक पर हुए हादसे के बाद गोविंद वन्य जीव विहार प्रशासन ने पार्क क्षेत्र के उच्च हिमालयी ट्रैकों पर पर्यटकों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। हालांकि अभी गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में देशी-विदेशी पर्यटकों की आवाजाही जारी है। वर्तमान में गोमुख, तपोवन, नंदनवन, केदारताल क्षेत्र में 50 से अधिक ट्रैकर्स और उनके साथ कई सपोर्टिंग स्टाफ मौजूद हैं, जबकि आने वाले एक हफ्ते के भीतर भी कई दल इस क्षेत्र में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
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बाहरी एजेंसियों के माध्यम से जाने वाले ग्रुप ही हादसे का शिकार हुए हैं। यदि स्थानीय अनुभवी एजेंसियों के माध्यम से ही उच्च हिमालय ट्रैक पर जाने की अनुमति दी जाए तो इस तरह की घटनाओं की संभावना कम है। इस संबंध में बार-बार प्रशासन से मांग की गई, इसके बावजूद बाहर की एजेंसियों की लापरवाही का खामियाजा जिले के पर्यटन कारोबार को भुगतना पड़ रहा है।
-जयेंद्र राणा, अध्यक्ष उत्तरकाशी ट्रैकिंग एंड माउंटेनियरिंग एसोसिएशन।