उत्तरकाशी। गंगोत्री धाम की यात्रा शुरू हुए एक माह बीतने को है, लेकिन धाम में बिजली, दूरसंचार आदि व्यवस्थाएं अभी तक दुरुस्त नहीं हो पाई है। ग्रिड की लाइन में फॉल्ट और रुद्रगैरा परियोजना की सिर्फ एक टरबाइन चलने से धाम में शाम होते ही अंधेरा पसर रहा है। गंगोत्री के स्नान घाट पर टूटे-फूटे चेजिंग रूम कबाड़खाना बने हुए हैं। धाम में लगे अव्यवस्थाओं के अंबार से शासन-प्रशासन की तैयारियों की पोल खुल रही है।
बीते 18 अप्रैल को गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के एक माह पहले से सरकारी मशीनरी यात्रा व्यवस्थाओं की तैयारी में जुटी थी। शासन-प्रशासन और सरकार के नुमाइंदे यात्रा व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होने के दावे कर रहे थे। अब यात्रा शुरू हुए एक माह बीतने को है, लेकिन व्यवस्थाएं बदहाल पड़ी हैं। ऊर्जा निगम ने गंगोत्री धाम को ग्रिड की बिजली से रोशन करने के दावे किए, लेकिन लगातार फॉल्ट के चलते धाम में ग्रिड की लाइन से बिजली नहीं पहुंच रही है। रुद्रगैरा पर बनी लघु जल विद्युत परियोजना की 50 किलोवाट की एक टरबाइन और केदारगंगा पर बनी 20 किलोवाट की परियोजना गंगोत्री मंदिर और आसपास के कुछ हिस्सों को ही रोशन कर पा रही है। शेष धाम में शाम होते ही अंधेरा पसरने से तीर्थयात्री गंगोत्री धाम में ठहरने से परहेज कर रहे हैं।
शीघ्र व्यवस्थाएं दुरुस्त करे प्रशासन
गंगोत्री व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतेंद्र सेमवाल, तीर्थ पुरोहित सुधांशु सेमवाल का कहना है कि शासन-प्रशासन यात्रा शुरू होने से पहले व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होने के खूब दावे करते हैं, लेकिन धरातल पर व्यवस्थाएं बदहाल रहती हैं। इससे देश-विदेश से आ रहे तीर्थयात्रियों में तीर्थधाम और सरकार के प्रति गलत संदेश जाता है।
कोट...
बीते दिनों मौसम खराब होने के कारण ग्रिड की लाइन में फॉल्ट आने से गंगोत्री धाम की विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई है। दूरसंचार कंपनियों की इंटरनेट सेवा भी काम नहीं कर रही है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराने के साथ ही संबंधित विभागों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा गया है।
चक्रधर सेमवाल, यात्रा मजिस्ट्रेट गंगोत्री।