उत्तरकाशी। पर्यावरणीय कारणों से अरबों रुपये खर्च करने के बाद वर्ष 2010 से बंद पड़ी एनटीपीसी की लोहारीनाग-पाला जल विद्युत परियोजना चोरों के लिए सोने की खान बनी हुई है। सरकार ने परियोजना निर्माण पर हुए खर्च के एवज में एनटीपीसी को 536.30 करोड़ रुपये हर्जाना तो दिया, लेकिन परियोजना साइट पर बिखरी परिसंपत्तियों को अपने अधीन करना भूल गई। ऐसे में इन आठ सालों के भीतर चोरों ने यहां करोड़ों की मशीन आदि सामानों पर हाथ साफ कर दिया। बंद पड़ी परियोजना की चौकसी की जिम्मेदारी संभालने वाले एनटीपीसी के अधिकारी पुलिस में तहरीर देकर अपनी जिम्मेदारी एवं जवाबदेही से पल्ला झाड़ रहे हैं।
वर्ष 2005 में गंगा भागीरथी पर 2775 करोड़ रुपये लागत से एनटीपीसी की 600 मेगावाट की जल विद्युत परियोजना का कार्य शुरू हुआ था। वर्ष 2010 में गंगा भागीरथी को राष्ट्रीय नदी घोषित कर केंद्र सरकार ने परियोजना पर रोक लगा दी थी। तब तक एनटीपीसी यहां विभिन्न निर्माण कार्यों पर करीब आठ सौ करोड़ खर्च कर चुकी थी। परियोजना बंदी के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने एनटीपीसी के 536.30 करोड़ के क्लेम को सही मानते हुए उन्हें हर्जाना दे दिया, लेकिन हीना से लोहारीनाग के बीच परियोजना के विभिन्न साइटों पर जमा करोड़ों की परिसंपत्तियों को लावारिस ही छोड़ दिया।
हालांकि एनटीपीसी ने इन परिसंपत्तियों की निगरानी के लिए यहां एक सिक्योरिटी ऑफिसर और सात सुरक्षा गार्ड तैनात किए हैं। बावजूद इसके परियोजना साइट पर चोरी का खेल धड़ल्ले से जारी है। चोर अब तक यहां से करोड़ों रुपये की मशीनों एवं अन्य सामानों पर हाथ साफ कर चुके हैं। बीते साल दिसंबर में एनटीपीसी के अधिकारियों ने पुलिस को चोरी की तहरीर दी थी, लेकिन अभी तक चोरी की गई परिसंपत्तियों का मूल्यांकन नहीं किया है।
करोड़ों के सामान हो गए चोरी
एनटीपीसी के सूत्रों के अनुसार चोरों ने डबराणी एवं कुज्जन में 3.5 करोड़ रुपये लागत से बने 33 केवीए के दो विद्युत सब स्टेशनों के चार व अन्य स्थानों पर रखे नौ ट्रांसफार्मरों का कीमती सामान निकालकर इन्हें खोखला कर दिया है। इसके अलावा खुदी हुई सुरंग में करीब एक किमी भीतर रखे चार बूमर और एक पोकलैंड मशीन, कुछ जनरेटर, संगलाई एवं हीना में रखी लोहे की भारी प्लेटें भी चोरी कर दी हैं। सोनगाड फील्ड हॉस्टल, कुज्जन के गेस्ट हाउस व साइट ऑफिसों का सामान चुराकर इन्हें खंडहर बना दिया है। चोरी हुई इन परिसंपत्तियों का मूल्य करोड़ों में हैं। बता दें कि करीब तीन साल पहले बंद पड़ी पाला-मनेरी परियोजना का लावारिस पड़ा एक पुल बेचने की कोशिश का मामला भी सामने आया था। तब एक कबाड़ी को गिरफ्तार कर मामला रफा-दफा कर दिया गया था।
कोट...
स्टाफ से चोरी की सूचना मिलने पर अधिकारियों ने सभी साइटों का निरीक्षण किया। दिसंबर 2017 में उत्तरकाशी पुलिस को चोरी की तहरीर दी गई। चोरी गई संपत्तियों का अभी मूल्यांकन किया जा रहा है।
रमाकांत, सीनियर मैनेजर एनटीपीसी हाइड्रो रीजन हेड क्वाटर देहरादून।
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परियोजना की करोड़ों की संपत्ति की रखवाली का जिम्मा एनटीपीसी का है। परियोजना की परिसंपत्तियों को लावारिस छोड़ने की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
ददनपाल, एसपी उत्तरकाशी।