उत्तरकाशी। जिले में यमुनोत्री-गंगोत्री धाम के अलावा कई पर्यटन स्थल है, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में पर्यटन इन स्थलों से अनजान है। ऐसे में पर्यटक, तीर्थयात्री यमुनोत्री-गंगोत्री तक ही पहुंचकर लौट जाते हैं। इससे यात्रियों व पर्यटकों के नहीं ठहरने से यात्रा मार्गों के पर्यटन व्यवसायी बैंक का ऋण तक नहीं चुका पा रहे हैं।
जिले में यमुनोत्री-गंगोत्री धाम के अलावा यहां हेल्थ टूरिज्म, जलक्रीड़ा, हिम क्रीड़ा, होम स्टे, योग, छोटे ट्रैक, जंगल सफारी, पौराणिक मंदिरों की लंबी श्रृंखला, मत्स्य आखेट, नदी, झील, बुग्याल, जैव विविधता, दुर्लभ वन्य जीव वाले नेशनल पार्क, ग्रामीण जनजीवन आदि तमाम विविधताएं हैं, लेकिन प्रचार-प्रसार की कमी के कारण पर्र्यटक व तीर्थयात्री इनसे अनजान है। पर्यटन विभाग में 139 होटल पंजीकृत हैं। करीब इतनी ही संख्या गैर पंजीकृत होटलों और आश्रमों की है। इसी तरह जिले के संभागीय परिवहन कार्यालय से ही 795 टैक्सी वाहन पंजीकृत हैं और इनके अलावा भी कई बाहरी जनपदों से पंजीकृत टैक्सी वाहन भी यात्रा मार्ग पर दौड़ रहे हैं। जिला पर्यटन अधिकारी प्रकाश खत्री का कहना है कि जिले में 139 होटल पंजीकृत हैं। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना से हर साल 16 टैक्सी वाहनों के लिए ऋण देने का लक्ष्य है, जबकि होटलों के लिए कर्ज की कोई सीमा नहीं है। गंगोत्री व्यापार मंडल से जुड़े सतेंद्र सेमवाल, शैलेष सेमवाल बताते हैं कि गंगोत्री में चार हजार यात्रियों के ठहरने के इंतजाम हैं, जबकि सीजन में यहां 300-400 रुपये में भी कमरे बुक नहीं होते।