उत्तरकाशी। गंगोत्री नेशनल पार्क में अज्ञात बीमारी की चपेट में आने से अंधी हुई भरल (ब्लू शीप) मामले में एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार एवं वन्य जीव संबंधित प्राधिकरणों से एक सप्ताह के भीतर संरक्षण की कार्ययोजना पेश करने को कहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब वन विभाग को यहां मौजूद वन्य जीवों की संख्या का ही पता नहीं है, तो वे संरक्षण की कार्ययोजना कैसे बनाएगा?
दुर्लभ वन्य संपदा से भरपूर गंगोत्री नेशनल पार्क में आज तक वन्य जीवों की कभी गणना नहीं की गई है, जबकि गोविंद वन्य विहार में वर्ष 2008 के बाद से कोई गणना नहीं हुई है। वाइल्ड लाइफ सेंचुरी एक्ट के अनुसार हर तीसरे साल दुर्लभ वन्य जीवों की गणना कराने का प्रावधान है। बीते दस साल से कभी गणना नहीं कराए जाने से हिम तेंदुआ, भूरा भालू, लाल लोमड़ी, भरल सहित करीब 19 से अधिक लुप्त प्राय प्रजातियों की संख्या में वृद्धि या गिरावट को लेकर विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि विभाग इनके संरक्षण को लेकर कोई कार्ययोजना कैसे बना पाएगा? वहीं, पशु प्रेमियों का कहना है कि पार्क में वन्य जीवों की गणना नहीं कराई जाएगी तो इनके संरक्षण के प्रयासों का मूल्यांकन कैसे किया जा सकेगा। पशु प्रेमी गणना नहीं किए जाने के पीछे वन्य जीव तस्करी का प्रभाव भी मान रहे हैं।
भारतीय वन्य जीव संस्थान की गणना में दिखे चिंताजनक आंकड़े
वर्ष 2015 में भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा राज्य के नंदादेवी, नीती माणा घाटी सहित गंगोत्री एवं गोविंद पशु विहारों में संयुक्त सर्वे किया गया था, जिसमें करीब 1044 ब्लू शीप, 237 हिमालयी थार, 4 कस्तूरी मृग, 11 हिमालयी घुरल, 10 काले भालू, 27 लाल लोमड़ी, 2 जंगली बिल्ली (लिंक्स), 5 भूरे भालू, 39 स्नो लेपर्ड, 2 हिमालयी सीरो सहित एक-एक र्गली भेड़, यलो थ्रोटेड मार्टिन पाए गए थे। हालांकि प्रदेश स्तर के यह आंकड़े अनुमानित हैं, लेकिन फिर भी यह चिंताजनक हैं।
कोट:
गोविंद पशु विहार में वन्य जीवों की गणना के लिए सर्वे नहीं हुआ है। हालांकि विभाग द्वारा इन जीवों के संरक्षण एवं गतिविधियों पर नजर रखने के लिए करीब 45 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं।
आरपी मिश्रा, उप निदेशक गोविंद नेशनल पार्क।
कोट:
दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र होने के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वन्य जीवों की गणना करना मुश्किल है। हालांकि सिक्योर हिमालय प्रोजेक्ट के तहत सर्वे एवं गणना करने की योजना तैयार की गई है। जिसके बाद ही सही जानकारी मिल पाएगी।
श्रवण कुमार, उप निदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क।