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आठ सालों से पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं भटवाड़ी के प्रभावित परिवार

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उत्तरकाशी। अगस्त 2010 में जमींदोज हुए भटवाड़ी गांव के ग्रामीणों को आज भी पुनर्वास का इंतजार है। आठ सालों से जल विद्युत निगम की खाली पड़ी कालोनी के दो-दो कमरों में शरणार्थियों सा जीवन जीने को मजबूर इन ग्रामीणों की शासन-प्रशासन सुध लेने को राजी नहीं। कमोबेश यही स्थिति प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील सीमांत जनपद उत्तरकाशी के 26 अत्यधिक संवेदनशील गांवों में रह रहे परिवारों की भी है। इनके पुनर्वास के प्रस्ताव भी वर्षों से शासन की फाइलों में दफन हैं।
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अगस्त 2010 में बिना बरसात के तहसील मुख्यालय वाला भटवाड़ी कस्बा और गांव भूधंसाव से तबाह हो गए। यहां सौ से अधिक दुकानें और मकानों के साथ गंगोत्री हाईवे का बड़ा हिस्सा जमींदोज हो गया था। प्रभावित परिवारों ने गांव के पास जल विद्युत निगम की कालोनी में शरण ली। तब सरकार ने प्रभावित परिवारों को आंशिक मुआवजा देने के साथ ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की घोषणा की थी। बाद के सालों में भी धंसाव का सिलसिला जारी रहा और तहसील भवन भी भरभरा कर ढह गया। भूवैज्ञानिकों की रिपोर्ट में भी इस गांव को खतरे में बताया गया है।
भू वैज्ञानिकों से प्रारंभिक और डिटेल सर्वे के बाद प्रशासन ने भटवाड़ी के 50 परिवारों के पुनर्वास की संस्तुति कर शासन को रिपोर्ट प्रेषित की, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। निगम कालोनी में रह रहे जग्रनाथ प्रसाद, विक्रम लाल, अमृत सेमवाल, अंबरीश रमोला आदि बताते हैं कि आपदा में घर तबाह होने के बाद से वे परिवार सहित कालोनी के 2-2 कमरों में शरणार्थियों के जैसे गुजर बसर कर रहे हैं। आठ सालों में शासन-प्रशासन एवं सरकार के नुमाइंदों ने सिर्फ आश्वासन दिए। सरकार किसी सुरक्षित जगह विस्थापित करे तभी जनजीवन पटरी पर लौट पाएगा।
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जिले में 26 गांव अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में
आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील उत्तरकाशी जनपद में भटवाड़ी, अस्तल, उडरी, धनेटी, सौड़, कमद, ठांडी, सिरी, धारकोट, क्यार्क, बार्सू, कुज्जन, पिलंग, जौड़ाव, हुर्री, ढासड़ा, दंदालका, अगोड़ा, भंकोली, सेकू, वीरपुर, बड़ेथी, कांसी, बाडिया, कफनौल एवं कोरना कुल 26 गांव अत्यधिक संवेदनशील चिन्हित किए गए हैं। इनमें से सिर्फ शुरूआती नौ गांवों का ही भूवैज्ञानिकों से डिटेल सर्वे कराया गया। इन गांवों में खतरे की जद में रहने को मजबूर परिवारों को भी वर्षों से पुनर्वास का इंतजार है।

कोट..........
भटवाड़ी गांव एवं कस्बा वर्ष 2010 से भूधंसाव की चपेट में है। गांव के करीब पचास परिवार कालोनी में शरणार्थी बनकर रहने को मजबूर हैं। यदि शीघ्र प्रभावित परिवारों का पुनर्वास नहीं किया गया तो ग्रामीण एकजुट होकर आंदोलन करेंगे।
राघवानंद नौटियाल, क्षेत्र पंचायत सदस्य भटवाड़ी।
कोट..........
भटवाड़ी गांव के पुनर्वास को लेकर डिटेल सर्वे एवं संस्तुति के साथ शासन को फाइल भेजी जा चुकी है। शासन से स्वीकृति के बाद ही प्रभावितों का पुनर्वास किया जा सकेगा। अन्य संवेदनशील गांवों के पुनर्वास के लिए डिटेल सर्वे की प्रक्रिया चल रही है।
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देवेंद्र नेगी, एसडीएम भटवाड़ी उत्तरकाशी।
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