नौगांव (उत्तरकाशी)। अभी तक अपेक्षित बारिश और बर्फबारी नहीं होने के कारण स्योरी फल पट्टी के सेब काश्तकारों की आजीविका खतरे में पड़ गई है। बीते छह माह में यमुना घाटी में महज तीन बार सामान्य बारिश हुई, लेकिन बर्फ एक बार भी नहीं हुई। ऐसे में स्योरी फलपट्टी के सेब बागानों में सेब के पेड़ केंकर रोग की चपेट में आकर सूखने लगे हैं।
नौगांव की स्योरी फल पट्टी में एक हजार से अधिक किसानों की आजीविका सेब उत्पादन पर टिकी है। मौसम की बेरुखी का आलम यह है कि बीते छह माह में क्षेत्र में महज तीन बार सामान्य बारिश हुई और बर्फ एक बार भी नहीं पड़ी। सेब की अच्छी पैदावार के लिए बर्फबारी जरूरी होती है। बिना बारिश और बर्फबारी के बड़ी संख्या में सेब के पेड़ केंकर रोग की चपेट में आकर सूख रहे हैं। ऐसे में किसानों को सेब के अच्छे उत्पादन की उम्मीद, तो दूर उल्टी वर्षों से बड़े किए गए सेब के पेड़ समाप्त होने की चिंता सताने लगी है।
क्षेत्र के सेब किसान गजेंद्र नौटियाल, राकेश राणा ने बताया कि मौसम में नमी नहीं होने के कारण किसान सेब के पेड़ों पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव और खाद का प्रयोग नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही सूखी जमीन में नई पौध का रोपण भी नहीं हो पा रहा है। बारिश और बर्फबारी नहीं होने से जल्दी फ्लावरिंग होने के कारण फ्रूट सेटिंग नहीं हो पाएगी, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा।
कोट..
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में बारिश और बर्फबारी की उम्मीद है। इस बर्फबारी से सेब की फसल को कुछ फायदा मिल सकता है। मार्च में ही उत्पादन का सही अंदाजा लग पाएगा। जरूरी तापमान नहीं मिलने से फलों की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा।
डा. पंकज नौटियाल, सेब विशेषज्ञ कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़।