उत्तरकाशी। मौसमी व बेमौसमी सब्जी उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु के बावजूद जिले की यमुना तथा गंगा घाटी के कस्बाई बाजारों में रोजाना प्रदेश के बाहर व राज्य की मैदानी मंडियों से सब्जियां पहुंच रही है। मंडी, भंडार सुविधा, खाद बीज व विपणन में सरकारी सहयोग मिले तो किसान स्थानीय खपत के साथ ही मैदानी मंडियों में भी बड़ी मात्रा में पहाड़ी जैविक सब्जी की आपूर्ति कर सकते हैं।
बरसाती सब्जी के अलावा जिले की विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्रों में साल में आलू, प्याज, टमाटर, मटर आदि कई सब्जियों की दो फसलें हो सकती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में 22 हजार मैट्रिक टन आलू के अलावा 34500 मैट्रिक टन अन्य सब्जियों का उत्पादन होता है, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकारी प्रोत्साहन न मिलने से जिले की कुल खपत के 15 फीसदी से भी कम उत्पादन हो पा रहा है। सब्जी कारोबारी तस्दीक खान, हरिलाल व शाहिद अली स्वीकार करते हैं कि अकेले उत्तरकाशी में ही नजीबाबाद, ज्वालापुर व देहरादून मंडी से रोजाना 5 ट्रक सब्जी आती है। यमुनाघाटी, जिले के अन्य कस्बों में भी रोजाना बाहर की सब्जी आ रही है। नौगांव फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन चंद तथा बार्सू भटवाड़ी के जगमोहन सिंह कहते हैं कि तापमान नियंत्रित रखने वाले पॉलीहाउस, टपक सिंचाई व भंडारण के साथ ही हाईब्रिड बीज, दवा कीटनाश व किसानों को उत्पादन तकनीकी पहुंचाने में सरकार मदद करे, तो यहां वर्षभर सब्जी उत्पादन में उनकी आय चौगुनी बढ़ सकती है।
कोट...
जिले में आलू बीज उत्पादन की योजना नहीं है। सब्जी प्रदर्शनी के लिए करीब सात लाख रुपये बीज, खाद दवा एवं कीटनाशकों के लिए बजट रहता है, जो कि किसानों की मांग के अनुसार अपर्याप्त है।
बृजराज सिंह, जिला आलू एवं शाक भाजी किसान अधिकारी।