उत्तरकाशी। आपदा के समय में अब आपातकालीन सेवा में तैनात कर्मचारी मौके पर पहुंचने को लेकर कोई बहाना नहीं बना पाएंगे। इसके साथ ही फील्ड के कर्मचारी भी अधिकारियों की आंख मेें धूल नहीं झोंक पाएंगे क्योंकि जिला प्रशासन ने जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और अटेंडेंस मॉनीटरिंग मोबाइल एप की शुरुआत कर दी है। इस सिस्टम के तहत कर्मचारियों की लापरवाही आसानी से पकड़ में आ जाएगी।
जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम के तहत लोनिवि की जेसीबी, जल संस्थान के वॉटर टैंकर, नगर पालिका के कूड़े दानों पर जीपीएस सिस्टम लगाया गया है। इनकी मॉनीटरिंग जिला प्रशासन करेगा। इस व्यवस्था में अगर कोई दुर्घटना या लैंड स्लाइड होता है तो लोनिवि की जेसीबी में तैनात कर्मचारी मौके पर तुरंत पहुंचेगा, जबकि जल संस्थान के वाटर टैंकरों का भी दुरुपयोग रुकेगा। नगर पालिका क्षेत्र में कई कूड़ेदान ऐसे हैं जिनसे हर रोज कूड़ा नहीं उठता है। ऐसे में इस पर भी जिला प्रशासन की नजर रहेगी। कुछ समय बाद यह व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सरकारी गाड़ियों में भी की जाएगी।
सभी विभागों में उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमीट्रिक हाजिरी लगाने की व्यवस्था शुरू कर दी गई है, लेकिन फील्ड कर्मचारी इससे बच जाते हैं। ऐसे में फील्ड कर्मचारियों की निगरानी के लिए अटेंडेंस मॉनीटरिंग मोबाइल एप शुरू किया गया है। इसके तहत एक एप बनाई गई है। इस एप को सभी फील्ड कर्मचारियों के एंड्रायड मोबाइल में इंस्टाल किया जाएगा, जिस पर उन्हें हर रोज हाजिरी लगानी होगी। यह व्यवस्था ऑफ लाइन ऑन लाइन दोनों में काम करेगी। अटेंडेंस मॉनीटरिंग मोबाइल एप के तहत फील्ड कर्मचारियों को अपनी हाजिरी लगाने के साथ ही कार्य स्थल में जाकर वहां का फोटो अपलोड करना होगा। अगर बाल विकास कल्याण के अधिकारी स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करने जाते हैं तो उन्हें वहां मौके पर जाकर परीक्षण की फोटो अपलोड करनी होगी। साथ ही अगर किसी बच्चे को रेफर किया जा रहा है तो इसकी भी डिटेल उसमें लिखनी होगी। जिलापूर्ति विभाग के कर्मचारियों को राशन की दुुकानों के निरीक्षण और लोनिवि, पीएमजेएसवाई आदि के कर्मचारियों को साइट में जाकर वहां के निरीक्षण व कार्यों की फोटो के साथ डिटेल भेजनी होगी।
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और अटेंडेंस मॉनीटरिंग मोबाइल एप को लांच कर दिया गया है। इस प्रकार की व्यवस्था से सीधे तौर पर आम लोगों को फायदा मिलेगा। कर्मचारी मौके पर जाकर समय पर काम करेंगे तो लोगों की परेशानी भी दूर होगी। वाहनों में जीपीएस लगाने के पीछे मकसद सरकारी वाहनों का दुरुपयोग रोकना और समय पर मदद पहुंचाना है। क्योंकि आपदा के लिहाज से उत्तरकाशी जिला संवेदनशील है। सड़क पर मलबा आने पर कई बार जेसीबी लेट में पहुंचती है, लेकिन अब यह बहाना नहीं चलेगा क्योंकि इसमें वाहन की लोकेशन ट्रेक होती रहेगी। कर्मचारी भी लापरवाही नहीं करेंगे।