उत्तरकाशी। गोमुख क्षेत्र में आए बदलाव ट्रैकिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। क्षेत्र में बने स्लाइड जोन व भागीरथी नदी का रुख बदलने से पर्वतारोहियों का पारंपरिक ट्रैक रूट क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे गोमुख से ऊपर की चोटियों पर जाने के लिए ट्रैकरों को काफी दिक्कत हो रही है। ट्रैकिंग व्यवसायियों को डर है कि अगर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ तो 2018 के सीजन में काफी नुकसान झेलना पड़ेगा। इससे निपटने के लिए उन्होंने प्रशासन व वन विभाग से भोजवासा के पास ही एक पुलिया या रोपवे का निर्माण करने कि मांग की है।
ट्रैकिंग व्यवसाय से जुड़े भागवत सेमवाल ने बताया कि तपोवन, नंदनवन सहित कई ऊंची चोटियों पर जाने के लिए पर्वतारोहियों को गोमुख ग्लेशियर के ऊपर से जाना होता है, लेकिन इस वर्ष हुई भारी बरसात से गोमुख के आसपास काफी भूस्खलन हुआ है। जिससे भागीरथी नदी रुख बदलकर बाईं तरफ से बहने लगी है। नदी का रुख बदलने व पहाड़ियों में स्लाइड जोन सक्रिय होने से ट्रैक पर चलना बहुत कठिन हो गया है। बरसात में जलस्तर बढ़ने के दौरान तो कई अभियानों को रद्द भी करना पड़ा था।
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ट्रैकिंग एसोसिएशन की ओर से लंबे समय से भोजवासा के पास एक पुलिया या ट्रॉली बनाने कि मांग की जा रही है। इसके बनने से ट्रैकरों को सुविधा होने के साथ ही गोमुख में बढ़ रहा मानव हस्ताक्षेप भी कम होगा।
- जयेंद्र राणा, अध्यक्ष, गढ़वाल हिमालय ट्रैकिंग माउंटेनियरिंग एसोसिएशन।
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भोजवासा में पुलिया बनाने को लेकर विचार किया जा रहा है, लेकिन संवेदनशील क्षेत्र होने की वजह से इसमें काफी सोच विचार करने की जरूरत है। विशेषज्ञों व उच्च अधिकारियों से वार्ता करने के बाद ही कुछ किया जा सकेगा।
- श्रवण कुमार, उप निदेशक, गंगोत्री नेशनल पार्क।