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डेढ़ दशक से विकास की राह ताक रहा रेकचा गांव

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पुरोला। गोविंद वन्य जीव विहार अंतर्गत पड़ने वाले मोरी ब्लॉक के रेकचा गांव का विकास संपर्क मार्गों में ही सिमट कर रह गया है। गांव में प्राथमिक विद्यालय तक नहीं है, जिससे गांवों के बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों में जाना पड़ता है। वर्ष 2003 में अस्तित्व में आई ग्राम पंचायत रेकचा 14 साल बाद भी विकास की बाट जोह रहा है।
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वर्ष 2003 में प्रदेश सरकार ने फिताड़ी ग्राम पंचायत से रेकचा व हरिपुर गांव को अलग कर ग्राम पंचायत रेकचा का गठन किया था, लेकिन गठन के 14 साल बाद भी गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। प्राथमिक विद्यालय, एएनएम सेंटर न होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में पेयजल लाइन भी न होने के कारण ग्रामीणों को आज भी फिताड़ी गांव से पानी ढोना पड़ रहा है। रेकचा गांव तक पीएमजीएसवाई ने मोटर मार्ग का निर्माण तो कर दिया है, लेकिन खेड़ा घाटी में गार्डर पुल नहीं बनने से अभी यहां वाहनों की आवाजाही भी नहीं हो रही है। प्रधान प्रहलाद सिंह रावत ने बताया कि ग्राम पंचायत के राजस्व गांव हरिपुर में प्राथमिक विद्यालय है, लेकिन रेकचा गांव से डेढ़ किमी दूर होने के कारण बच्चे फिताड़ी गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने को मजबूर है। गांव में स्वच्छता मिशन के तहत 80 फीसदी शौचालय के गड्ढे तैयार है, लेकिन पुल नहीं बनने के कारण गांव में सीमेंट सरिया न पहुंचने से शौचालयों का कार्य अधर में लटका है। प्रधान ने बताया कि गांव में प्राथमिक विद्यालय, एएनएम सेंटर खोलने आदि प्रस्ताव कई बार शासन-प्रशासन को भेज दिए गए हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।
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