बड़कोट (उत्तरकाशी)। भक्तों के सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने वाली मां यमुना अपने ही मायके में बेघर है। अधूरे निर्माण के चलते इस बार भी मां यमुना मंदिर में विराजमान नहीं हो सकेंगी। शीतकालीन प्रवास के दौरान खरशाली में पुरोहित समाज की कुल देवी राजराजेश्वरी के मंदिर में ही मां यमुना की उत्सव मूर्ति रखी जाएगी।
यमुना के मायके खरशाली में पुरोहित समाज ने वर्षों पहले कुल देवी राजराजेश्वरी का मंदिर बनाया था। यमुना का अपना कोई मंदिर नहीं होने से मां यमुना जी की उत्सव मूर्ति इसी मंदिर में रखकर पूजा-अर्चना की जाती है। वर्ष 2006-07 में पंचपंडा समिति ने समाज के साथ मिलकर खरशाली में मंदिर निर्माण के लिए भूमि क्रय की थी। तब से लेकर अब तक पंडा समिति के स्वयं के आय स्रोत और विधायक निधि आदि से मंदिर के निर्माण पर करीब 45 लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं, लेकिन मंदिर अभी भी अधूरा पड़ा है। एक दशक से निर्माणाधीन यमुना मंदिर के आधे-अधूरे निर्माण कार्य के लिए पंचपंडा समिति के साथ पुरोहित समाज भी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है, क्योंकि एक दशक में समाज के सभी प्रमुख लोगों को समिति में रहने का अवसर मिला है। इधर पंचपंडा समिति के अध्यक्ष वेद प्रकाश उनियाल कहते है कि यमुना के मंदिर निर्माण का कार्य लगभग अंतिम चरण में है।