उत्तरकाशी। उत्तरकाशी में चार घंटे की थानाध्यक्ष ने खूब जलवा दिखाया। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर थाने का जिम्मा संभालते हुए उन्नीस वर्षीया पूनम ने बाल मजदूरी ही नहीं बंद कराई बल्कि पूरे नगर क्षेत्र में गश्त लगाकर बाल मजदूरी और शोषण के खिलाफ दुकानदारों को जागरूक किया।
हीना गांव की पूनम रावत ने बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे उत्तरकाशी थाने में पहुंचकर थानाध्यक्ष महादेव उनियाल से चार घंटे का चार्ज संभाला। इसके बाद थाना परिसर में आयोजित कार्यक्रम में पूनम ने बाल मजदूरी और शोषण के खिलाफ एक नाटिका में थाना प्रभारी की भूमिका निभाई। एक थानाध्यक्ष केअंदाज में उन्होंने दुकान में काम कर रहे एक नाबालिग बच्चे को उसके घर तक पहुंचाया। इसके बाद पूनम थानाध्यक्ष के वाहन में नगर क्षेत्र की गश्त पर निकली। उनके साथ एक सिपाही भी रहा। उन्होंने जीजीआईसी के बाहर खुली दुकानों में बेचे जा रहे तंबाकू और गुटके आदि को लेकर दुुकानदारों को सख्त हिदायत दी कि दुकान के सामने 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को गुटका व तंबाकू न बेचें। इस संबंध में दुकान के आगे एक बोर्ड भी लगाया जाए। पास के होटलों का भी जायजा लेते हुए उन्होंने दुुकानदारों से स्पष्ट कहा कि अगर दुकान में शराब परोसते हुए पकड़े गए या शराब बरामद होती है, तो कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद पूनम उत्तरकाशी थाने लौटकर उन्होंने थानाध्यक्ष महादेव उनियाल को कार्यभार सौंपा।
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समाज सुधारक बनना चाहती है पूनम
पूनम रावत उत्तरकाशी स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक की द्वितीय वर्ष की छात्रा है। उसके पिता विरेंद्र सिंह रावत की हीना गांव के पास दुकान है। मां गृहणी है, जबकि घर में उसकी दादी के अलावा दो छोटी बहनें और एक छोटा भाई है। पूनम भविष्य में वह समाज सुधारक बनना चाहती है। इसके लिए जो भूमिका उन्होंने थानाध्यक्ष के रूप में आज निभाई है, उसे वह भविष्य में पाना चाहती है। वह कहती हैं कि इसके लिए वह खूब मेहनत करेगी।
बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना है लक्ष्य
श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम और प्लान इंडिया के सहयोग से बालिकाओं में आत्म विश्वास जगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर कोतवाली में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम के परियोजना प्रबंधक गोपाल थपलियाल ने बताया कि यह पहला मौका है, जब यहां किसी लड़की को एक दिन के लिए कोतवाली का चार्ज दिया गया है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय से विशेष अनुमति ली गई थी। इसका उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्र की बालिकाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इस प्रकार के कार्यक्रमों से बालिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने बताया कि विगत वर्ष तीन बालिकाओं को तीन गांव का प्रधान बनाया गया था। इस दौरान एसपी सुखवीर सिंह, थानाध्यक्ष महादेव उनियाल, कार्यक्रम समन्वयक अजय पंवार, शांति ठाकुर आदि शामिल रहे।