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गोमुख ग्लेशियर की गाद ने रोकी जलविद्युत परियोजना की टरवाइने

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उत्तरकाशी। गोमुख ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटने से भागीरथी में आई गाद ने 394 मेगावाट की दो जल विद्युत परियोजना की टरबाइनें बंद कर दी है, जिससे बिजली उत्पादन ठप हो गया है।
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ग्लेशियर के साथ आए रेत, मिट्टी, पत्थर के मलबे का असर गोमुख से 145 किमी डाउन में मनेरी भाली परियोजना के धरासू विद्युत गृह तक देखा गया। 304 मेगावाट की परियोजना से 280 मेगावाट बिजली उत्पादन होता है। गाद आने से सोमवार रात को 10.30 बजे जोशियाड़ा बैराज में गेट बंद कर बुधवार दस बजे तक बिजली उत्पादन रोका गया। परियोजना को अधिकारी एक माह तक बंद रखने के लिए उच्चाधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। तीन दिन से परियोजना में बिजली उत्पादन ठप है। मनेरी भाली परियोजना के डीजीएम संजय जोशी ने स्वीकार किया कि भागीरथी में गाद का स्तर 5700 पीपीएम पार करने से विद्युत गृह को बंद करने की नौबत आई। उनकी टरबाइनें 3000 पीपीएम तक के लिए डिजाइन की गई है।
गंगोत्री में सिंचाई विभाग सुरक्षा दीवार व तटबंध बना रहा है। नाबार्ड की मद्द से 2.22 करोड़ की योजना से पुराने एक तटबंधों में कराए काम इस बार भागीरथी के उफान में बह गया। विभाग के ईई प्रेम सिंह पंवार ने स्वीकार किया कि गंगोत्री के अपस्ट्रीम में बड़े पत्थर से टकराकर भागीरथी के बहाव से यह नुकसान हुआ है।
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