उत्तराखंड को आपदा ने केवल मानवीय क्षति ही नहीं पहुंचाई, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था पर भी करारी चोट की है। पानी का कहर राज्य में तकरीबन 14 हजार लघु और मध्यम इकाईयों (एसएमई) के अस्तित्व पर पानी फेर गया।
जानकारों की मानें तो इससे प्रदेश की ‘रीढ़’ पर करीब पांच सौ करोड़ की चोट लगी है। उत्तराखंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन का खुद का अनुमान इस आपदा केचलते लगभग 45 हजार लोगों का रोजगार प्रभावित होने का है। बर्बाद हुई इकाईयों को लेकर अब बैंकों से लोन की री-स्ट्रक्चरिंग की बात करने की तैयारी की जा रही है।
अकेले होटलों की ही बात करें तो 80 से ज्यादा के बर्बाद होने की पुख्ता जानकारी अब तक सामने आ चुकी है। इसके अलावा अलकनंदा और भागीरथी के किनारे होने वाली बीच कैंपिंग की बात की जाए तो इससे लगभग 10 करोड़ के नुकसान का अनुमान है। एक कैंप पर तकरीबन 15 से 20 लाख का निवेश होता है। नदी के किनारों पर तीन दर्जन से अधिक कैंप लगे थे।
सबसे बड़ा नुकसान छह जिलों में
रूद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, टिहरी, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा इन छह जिलों में सबसे ज्यादा नुकसान का अनुमान है। इसके अलावा देहरादून, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर में भी आंशिक रूप से नुकसान होने का अनुमान है।
यह इकाईयां हुईं सर्वाधिक प्रभावित
टूर एंड ट्रैवल्स, फूड प्रोसेसिंग, होटल, प्लास्टिक
साल से अधिक लगेगा नुकसान से उबरने में
आपदा के असर से उबरने मे एक साल से अधिक लग सकता है। बड़े क्षेत्र में सड़केंनहीं रह गई हैं। बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। इकाईयों का पुनर्गठन होगा। कुल मिलाकर 12 महीने मानकर चला जा सकता है।
लघु उद्यमियों को तुरंत मिले सब्सिडी
सचिव लघु उद्योग से हमारी बात हुई है। जिन लघु उद्यमियों/आवेदकों के आवेदन लंबित है, हमने उन्हें तुरंत पैसा सैंक्शन किए जाने की बात उठाई है, ताकि वह जल्द से जल्द पैसा लेकर काम शुरू कर सकें। इसके अलावा एसोसिएशन बचाव कार्य के पश्चात नुकसान का पूरा डाटा तैयार करेगी ताकि आगे के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें।
-पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, उत्तराखंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन