उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे साकेत बहुगुणा को कांग्रेस पार्टी से निकाल दिया गया है। साकेत बहुगुणा को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है।
इसके साथ ही कांग्रेस के संगठन सचिव अनिल गुप्ता को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। अनिल गुप्ता पर बागी मंत्री हरक सिंह रावत संग पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे हैं।
इधर, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे साकेत को पार्टी से निकाले जाने के पीछे विजय बहुगुणा के बागी तेवरों को जिम्मेदार माना जा रहा है।
विजय बहुगुणा से किया गया कोई वायदा पूरा नहीं हुआ
विजय बहुगुणा
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उत्तराखंड के सियासी संकट का समाधान निकालने पहुंची कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रीता बहुगुणा को पूर्व मुख्यमंत्री व उनके भाई विजय बहुगुणा ने स्पष्ट कर दिया कि उनसे किया गया कोई वायदा पूरा नहीं हुआ।
वे कई बार सोनिया गांधी से भी मिले, आश्वासन मिला, लेकिन नतीजा नहीं निकला। मुलाकात के बाद रीता बहुगुणा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निजी सचिव वी.जॉर्ज को अपडेट कर दिया है।
फिलहाल रीता बहुगुणा से भी बागियों की वापसी का प्रबंधन होता नहीं दिख रहा है। सूत्रों की मानें तो दिल्ली में रीता बहुगुणा ने विजय बहुगुणा से मुलाकात की। सूत्र बताते हैं कि विजय बहुगुणा ने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री बने तो वायदे के अनुसार हरीश रावत कैंप को एक राज्यसभा, स्पीकर और दो मंत्री पद दिए गए थे।
अलग-अलग विधायकों को संसदीय सचिव और अन्य दायित्व दिए। जब हरीश रावत मुख्यमंत्री बने तब शैलेंद्र मोहन सिंघल और सुबोध उनियाल को मंत्री बनाने और राज्यसभा सीट देने का वायदा हुआ था। यह भी तय हुआ था कि बहुगुणा समर्थक विधायकों को तवज्जो दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बातचीत के बाद रीता बहुगुणा ने सारी स्थिति से सोनिया के सचिव वी.जॉर्ज को भी अवगत करा दिया है।