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लापरवाही की हद, पीड़ितों तक नहीं पहुंच रही राहत

Fri, 28 Jun 2013 10:57 AM IST
देहरादून/हरिद्वार/ब्यूरो
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उत्तराखंड की तबाही के पीड़ितों तक 12 दिन बाद भी कोई खास राहत नहीं पहुंच सकी है। देश भर से भेजी जा रही मदद और राहत सामग्री खराब सड़कों और सरकारी लापरवाही की वजह से रास्ते में ही अटक गई है।
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राहत सामग्री से भरे तमाम ट्रक हरिद्वार, ऋषिकेश और देहरादून में खड़े हैं। सब कुछ राम भरोसे दिख रहा है।

न यह बताने की व्यवस्था है कि राहत सामग्री कहां पहुंचाई जाए, न ही रिसीव की जा चुकी राहत को आगे पहुंचाने का कोई इंतजाम। इस बदइंतजामी के चलते अब तक 42 ट्रक तो राहत सामग्री से भरे ही लौट चुके हैं।

आलम यह है कि राशन के संकट से जूझ रहे पीड़ितों की मदद के लिए भेजी यह सामग्री बड़ी मात्रा में हरिद्वार, ऋषिकेश में ही गैर-जरूरतमंदों में बांट दी जा रही है।
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पहले फंसे तीर्थयात्रियों को निकालने की प्राथमिकता और अब प्रशासन की लापरवाही ने आपदा के पीड़ितों की लाचारगी और बढ़ा दी है। हालांकि ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग खुल गया है, लेकिन राज्य की सैकड़ों सड़कें अब भी बंद है।

आपदा से रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी जिले के कई गांव और कस्बे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। शेष इलाकों से कट जाने के चलते कई गांवों में तो अन्य वस्तुओं के साथ राशन का संकट पैदा हो गया है।

इन इलाकों के लिए जो वाहन राहत सामग्री के साथ भेजे भी जा रहे हैं, वे खराब सड़कों के कारण रास्ते में अटक रहे हैं। कई ट्रक उत्तराखंड की सीमा पर खड़े हैं, लेकिन किसी चेक पोस्ट पर यह बताने की व्यवस्था नहीं है कि राहत सामग्री कहां पहुंचानी है।

हरिद्वार में राहत सामग्री के लिए सीसीआर टावर में स्टोर बनाया गया है। यहां अब तक हरिद्वार, गाजियाबाद, लखनऊ, हरियाणा और दिल्ली से 36 ट्रक राहत सामग्री आई है। स्टोर में पड़ी बड़ी मात्रा में राहत सामग्री का क्या होगा, इसकी खैर-खबर लेने वाला कोई नहीं है।

पीडितों की मदद के लिए सेना ने लॉन्च की वेबसाइट

खाद्य पदार्थों की पेटियां टूटी पड़ी हैं, स्टोर में सामान बिखरा पड़ा है। स्टोर में कई बोरी आलू भी है। उन्हें आगे भिजवाने की व्यवस्था नहीं की गई। नतीजतन आलू सड़ने लगा है।

बताया जा रहा है कि दिल्ली, हरियाणा समेत अन्य जगहों से आने वाली राहत सामग्री को पहाड़ ले जाने के बजाय कई वाहन संचालक हरिद्वार में ही झुग्गी बस्तियों में बांटकर लौट रहे हैं।

ट्रकों को अनलोड करने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऋषिकेश से हरियाणा के 40 ट्रक लौटे थे। राहत सामग्री भेजने वालों के कहने पर ट्रक वालों ने इसे गरीबों में बांट दिया।

प्रशासन ने देहरादून में आपदा राहत सामग्री कलेक्शन सेंटर महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कालेज में बनाया है। पहले ट्रांसपोर्टनगर स्थित एक व्यवसायी के गोदाम में कलेक्शन सेंटर था। यहां अन्य राज्यों से ट्रकों के आने का सिलसिला जारी है।

प्रशासन ने देहरादून के ट्रांसपोर्टरों से वाहनों का अधिग्रहण कर परेड ग्राउंड पर खड़े कर दिए हैं। लेकिन इन वाहनों का भी समुचित इस्तेमाल पहाड़ पर राहत सामग्री भेजने में नहीं हो रहा है। ऐसे में अन्य संगठनों, संस्थाओं को पहाड़ पर राहत सामग्री भेजने के लिए वाहन नहीं मिल रहे हैं।

ट्रकों में पड़ी है राहत सामग्री
प्रशासनिक लापरवाही का ही नतीजा यह है कि विभिन्न स्थानों से उपलब्ध होने वाली राहत सामग्री छुटभैये नेताओं की ओर से झुग्गी बस्तियों में वितरित की जा रही है।

कांग्रेस की ओर से दिल्ली और हरियाणा से रविवार को 70 बड़े ट्रकों में राहत सामग्री ऋषिकेश भेजी गई। ज्यादातर सामग्री अब भी ऋषिकेश में ट्रकों में पड़ी है।

हालांकि कांग्रेस के कुछ नेता कहते हैं कि बड़े ट्रकों को पहाड़ में भेज पाना संभव नहीं हो पा रहा है, लिहाजा उन्हें 48 छोटे ट्रकों में अनलोड कर श्रीनगर बेसकैंप भेजा गया है।

लेकिन जानकारों की मानें तो 70 बड़े ट्रकों को छोटे वाहनों में अनलोड करने पर कम से कम 140 से अधिक ट्रकों में माल आना चाहिए। यानी कांग्रेस नेताओं की मानें तो भी 92 छोटे ट्रकों लायक सामग्री अब भी यहीं है।

कब खुलेंगी 454 बंद सड़कें
प्रशासनिक लापरवाही के साथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त सड़कें भी आपदा पीड़ितों तक राहत पहुंचाने में बाधा बनी हुई है। गढ़वाल मंडल में अब भी बंद है। इच्छाशक्ति के अभाव के साथ मौसम भी इसमें बाधा है। गढ़वाल मंडल में अभी भी 454 सड़कें बंद है।

राजमार्गों के अलावा जिलों को एक दूसरे से जोड़ने वाली सड़कों की स्थिति भी बेहद खराब है। ऐसे में आपदा पीड़ित ग्रामीणों की दिक्कतें बढ़ गई है। सैकड़ों गांवों का यातायात संपर्क कटा हुआ है। आपदाग्रस्त उत्तरकाशी में 52, चमोली में 45 और रुद्रप्रयाग में 51 सड़कें बंद हैं।

लोनिवि के मुख्य अभियंता, गढ़वाल आरपी भट्ट का कहना है कि बंद सड़कों को खोलने के लिए 197 मशीनें लगाई गई है। वरीयता के अनुसार सड़कों को खोलने का कार्य चल रहा है।

यह है राहत सामग्री
बाहर से आई राहत सामाग्री में कंबल, तिरपाल, छाता, कपड़े, जूते-चप्पल, जीवन रक्षक दवाइयां, फूड पैकेट्स तथा ड्राई राशन आदि हैं।

-200 गांव अलग-थलग पड़े हैं। यहां से नुकसान की रिपोर्ट अभी नहीं पहुंची, मांगी गई है। यहां राहत सामग्री की सख्त जरूरत।

विभिन्न प्रदेशों से अभी तक 250-300 वाहन रसद लेकर आ चुके हैं। सड़क मार्ग के अलावा जौलीग्रांट हेलीकॉप्टर से भी पैकेट बनाकर भेजे जा रहे हैं। देहरादून में सामग्री लेकर आए वाहनों की डाउनलोडिंग में कोई समस्या नहीं है। ऋषिकेश से सीधे भी वाहन भेजे जा रहे हैं।- बंशीधर तिवारी, अपर नोडल ऑफिसर

राहत सामग्री को देहरादून में एकत्रित किया जा रहा है। सभी लोगों से यहीं पर सामग्री जमा कराने को कहा गया है। ऋषिकेश में एकत्रित सामग्री के लिए वाहन भेजना संभव नहीं है, उसे यहीं जमा कराना होगा।- बंशीधर तिवारी, एडीएम दून
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