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खराब मौसम, दुर्घटना से भी नहीं डिगा जवानों का हौसला

Thu, 27 Jun 2013 01:03 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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उत्तराखंड में खराब मौसम और मंगलवार की हेलीकॉप्टर दुर्घटना भी सेना-वायुसेना के जवानों के हौसले पर असर नहीं डाल पाई है।
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बुधवार की भी शुरुआत खराब मौसम से हुई। हल्की बारिश, बादल और धुंध ने बचाव कार्य में बाधा डाली। फिर भी जगह-जगह फंसे लगभग 2000 से ज्यादा लोग हेलीकॉप्टर और पैदल मार्ग से शाम तक निकाले गए।

हालांकि ताजा आंकड़ों के मुताबिक बदरीनाथ धाम में अब भी साढ़े सात हजार से ज्यादा लोग फंसे हैं। इनमें लगभग साढ़े चार हजार तीर्थयात्री और बाकी स्थानीय लोग हैं। जबकि मंगलवार को शासन ने इनकी संख्या चार हजार बताई थी। 400 लोग अब भी हर्षिल में फंसे हैं।
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बदरीनाथ और अन्य जगहों पर फंसे लोग अब धैर्य भी खो रहे हैं। मौसम विभाग की मानें तो बृहस्पतिवार को भी मौसम खराब रहने की आशंका है।

लामबगड़ में अलकनंदा नदी पर लोहे का फुट ब्रिज बनने से बचाव अभियान में तेजी आई है। अलकनंदा के तट पर सैकड़ों लोग वहां से निकाले जाने के इंतजार में हैं।

रविवार को इस पुल से 450 लोग सुरक्षित जोशीमठ पहुंचाए गए। इसके अलावा 26 हेलीकाप्टरों ने हर्षिल से 800, बदरीनाथ से लगभग चार सौ लोग निकाले। अन्य जगहों से भी चार सौ लोग पैदल और सड़क मार्ग से सुरक्षित निकाले गए।

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आठ सौ लोग बदरीनाथ से पैदल लामबगड़ के लिए जवानों के साथ चले। इन्हें बृहस्पतिवार को जोशीमठ पहुंचाया जा सकता है। सेना और प्रशासन के मुताबिक उत्तरकाशी में मातली, भटवाड़ी, मनेरी में सभी लोग निकाल लिए गए हैं।

हेलीकॉप्टरों ने बद्रीनाथ-जोशीमठ, गौचर और देहरादून से उड़ान भरी। एयर चीफ मार्शल एनएके ब्राउन ने गौचर में राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लिया।

तस्वीरों में: तबाही की निशानियां

उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर दुर्घटना से वायुसेना का अभियान बिल्कुल प्रभावित नहीं होगा। यह सभी को सुरक्षित निकाले जाने तक चलता रहेगा। आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत ने भी प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य का निरीक्षण किया।

बीआरओ ने निकाले 2000 लोग
सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने अथक प्रयासों के जरिए गौरीकुंड से सड़क के रास्ते 2000 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने में कामयाबी हासिल की।

केंद्र को भेजी गई बीआरओ की रिपोर्ट के मुताबिक संगठन ने सोनगंगा और गौरीकुंड के बीच दो तात्कालिक लॉग पुल बनाए, जिससे 2000 तीर्थयात्रियों को निकाला जा सका। करीब 4000 लोग दिन-रात राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।

‘केदारनाथ घाटी में जिन लोगों की संपत्ति बाढ़ में नष्ट हो गई है, राज्य सरकार की ओर से उन्हें विशेष पैकेज दिया जाएगा। किसानों को भी 200 रुपये की बजाय 5000 रुपये की सहायता दी जाएगी।’--विजय बहुगुणा, मुख्यमंत्री उत्तराखंड
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साल भर बंद रहेगा हेमकुंड साहिब
उत्तराखंड में भीषण तबाही में सड़कों के पूरी तरह तबाह होने से हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा में इस साल दर्शन नहीं हो पाएंगे। 17वीं शताब्दी के सिखों के इस पवित्र स्थल को बुरी तरह से नुकसान पहुंचा है। श्री हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के स्टाफ को भी नीचे गुरुद्वारा गोविंद धाम आने के लिए कह दिया गया है।

-हर्षिल से 800 और बदरीनाथ से 400 लोग हेलीकाप्टर से निकाले गए।
-लामबगड़ से 450 लोग और 400 अन्य जगहों से सड़क मार्ग से निकले।
-एयरफोर्स ने गौरीकुंड से केदारनाथ के बीच तलाशी अभियान भी चलाया।
-केदारघाटी में अब कोई यात्री नहीं, भटवाड़ी व मनेरी से भी सभी निकले।
-बदरीनाथ धाम में लगभग 7500 और हर्षिल में 400 लोग अब भी फंसे।
-आठ सौ लोग बदरीनाथ से लामबगड़ के लिए बुधवार को पैदल निकले।
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