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वन्यजीवों को पहले ही हो गया था आपदा का अहसास

Thu, 11 Jul 2013 08:16 AM IST
प्रेम प्रताप सिंह
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कहते हैं कि वन्यजीवों को किसी संकट का पहले ही आभास हो जाता है। क्या उन्हें केदारनाथ की आपदा का पहले ही अहसास हो गया था और वे सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे! लगता तो ऐसा ही है। क्योंकि केदारनाथ वन्यजीव विहार के किसी भी वन्यपशु के मरने की सूचना नहीं मिली है।
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रामबाड़ा, गौरीकुंड और सोनप्रयाग केदारनाथ वन्यजीव विहार क्षेत्र का हिस्सा है। आपदा में कई हजार लोगों ने जान गंवाई। चौंकाने वाली बात यह है कि इन क्षेत्रों में एक भी वन्यजीव के मरने की जानकारी नहीं है। घटना के लगभग 25 दिन बाद भी इस क्षेत्र में किसी भी वन्यजीव की लाशें नहीं मिली।

वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी आपदा या भूकंप के आने से पहले वन्यजीवों और जानवरों को आभास हो जाता है। ऐसे में आपदा आने से पहले ही सुरक्षित स्थान के लिए चले जाते हैं, जिससे उनकी जान को कोई नुकसान नहीं हो पाता। ऐसा इस बार भी देखने को मिला है।
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इन वन्यजीवों का है वास स्थल
हिमालय थार, काला भालू, गुलदार, मोनाल, सांभर, लाल लोमड़ी, कस्तूरी मृग।

पूर्व में कई अनुसंधान हो चुके हैं, जिसमें यह तसवीर सामने आ चुकी है कि भूकंप या किसी प्राकृतिक आपदा आने से पहले जानवरों और वन्यजीवों को आभास हो जाता है। ऐसे में वे खुद ही अपने लिए सुरक्षित स्थान की तलाश कर लेते हैं।
- विभाष पांडव, वैज्ञानिक भारतीय वन्यजीव संस्थान

केदारनाथ वन्यजीव विहार में अभी तक एक भी वन्यजीव के मरने की जानकारी नहीं है। इसका मुख्य कारण यह है कि वन्यजीवों को मौसम या किसी भी आपदा के बारे में उन्हें पूर्वानुमान हो जाता है। ऐसे में वह खुद ही आपदा से बचाव के लिए सुरक्षित जगहों पर चले जाते हैं।
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- एसएस शर्मा, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव

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