धारी देवी मंदिर परिसर में दरारें नजर आने लगी हैं। देवी मूर्ति के आसन के बाएं ओर बड़ी दरारें पड़ गई हैं, जबकि सामने की ओर भी हल्की दरारें नजर आ रही हैं। जीवीके के मुताबिक बाढ़ के दौरान बड़े पेड़ों और भारी सामान के टकराने से हुए कंपन के कारण दरारें पड़ी हैं। गंभीर बात नहीं है केवल बाहरी टाइल्स को ही नुकसान पहुंचा है।
आपदा को मान रहे देवी का प्रकोप
16 जून को धारी देवी मूर्ति शिफ्टिंग के बाद आई आपदा को लोग देवी का प्रकोप मान रहे हैं। सोमवार सुबह देवी के आसन के नीचे आई दरारों से अफवाहों का बाजार फिर गर्म हो गया है। मूर्ति के आसन पर कई जगह दरारें दिखने लगी हैं। इनमें बाएं ओर दो-तीन जगहों पर करीब ढाई फीट लंबी दरारें हैं जबकि सामने दाहिने ओर भी इतनी ही लंबी दरारें नजर आ रही हैं।
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आम जन इसे देवी का प्रकोप मान रहे हैं लेकिन पुजारियों ने इसे दैवी प्रकोप मानने से साफ इनकार किया है। पुजारियों के मुताबिक बाढ़ के दौरान मंदिर के सपोर्टिंग पिलरों पर भारी तनों और अन्य सामान के टकराने से हुए कंपन के कारण ये दरारें आई हैं।
मूर्ति या मंदिर को कोई खतरा नहीं है, परिसर पूरी तरह सुरक्षित है। दरारें केवल बाहर ही हैं, अंदर से ढांचे को कुछ नहीं हुआ है। यह अस्थायी ढांचा है, स्थायी मंदिर तो अभी बनना बाकी है।
- वाईआर शर्मा, पीआरओ जीवीके
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