किसी ने टीवी स्क्रीन पर देखा कि उनके परिजन सही-सलामत रेस्क्यू किए जा रहे हैं। किसी ने अखबारों में फोटो देखी। लोग खुश हुए कि उनके परिजन जिंदा हैं। शासन-प्रशासन की ओर से जारी बदरी-केदारघाटी से बचाकर लाए गए लोगों की सूची में भी नाम है, लेकिन अब नई मुसीबत सामने आ गई है।
शिकायत यह है कि सैकड़ों लोग मिल नहीं रहे। परिजन परेशान हैं। आखिर ढूंढें तो कहां ढूंढे। कोई अस्पताल के चक्कर काट रहा है तो कोई कंट्रोल रूम के। सही जानकारी नहीं मिल पा रही।
लेकिन वह कहां हैं?
पुलिस और आपदा सूचना केंद्र की लिस्ट में ऐसे लोगों के नाम दर्ज है। जबकि कई ऐसे भी हैं जिनका नाम लिस्ट में भी नहीं है। लेकिन टीवी फुटेज या अखबारों में छपी फोटो के जरिये यह तय हो गया है कि उनके अपने जिंदा है। जिन्हें रेस्क्यू कर ऋषिकेश पहुंचाया गया। लेकिन वह ऋषिकेश में हैं कहां।
इसका जवाब किसी के पास नहीं है। ऐसे सैकड़ों परिजन हैं जो दून पुलिस लाइन स्थित पूछताछ केंद्र से ऋषिकेश राहत शिविर तक दर-दर भटक रहे हैं। एक तरफ उन्हें खुशी है कि उनके परिजन जिंदा हैं तो दूसरी तरफ परिजनों के अभी तक न मिलने से वह निराश भी हैं।
जोधपुर के श्रीकांत ने अपनी बहन की फोटो 29 जून के अखबारों के संस्करण में देखी। फोटो में साफ दिख रहा है कि उसकी बहन गौचर या किसी अन्य स्थान पर आपदा से प्रभावित लोगों की लाइन में सबसे आगे लगी हुई है। एक सैन्य कर्मी श्रीकांत की बहन को चॉपर में बैठा रहा है।
पुलिस के आलाधिकारियों के पास गया
यह फोटो लेकर श्रीकांत पुलिस के आलाधिकारियों के पास गया। उसने उत्साह के साथ बताया कि उसकी बहन जिंदा है। उसे सेना ने रेस्क्यू किया है। उसके बाद पुलिस और आपदा केंद्र में पूछा गया तो वहां उसकी बहन की कोई सूचना ही नहीं थी। पुलिस अधिकारियों ने ऋषिकेश और दून के अस्पतालों की भी खाक छानी लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ।
अधिकारी भी हैरान है, क्योंकि मामला केवल श्रीकांत की बहन का नहीं है। ऐसे मामले सैकड़ों की तादाद में है। जिनके परिजनों को रेस्क्यू किया गया है। लेकिन वह हैं कहां यह किसी को नहीं पता।
हद तो तब हो गई जब परिजनों को इंतजार करने को कहा गया। लेकिन एक हफ्ता बीत जाने के बाद कुछ पल के लिए खुश हुए परिजनों के माथे पर अब फिर से चिंता की लकीरें साफ दिखने लगी है।
रोते हुए श्रीकांत बताता है ‘भाई साहब, कहां जाऊं, क्या करूं।’ अखबार में बहन का फोटो देखा तो खुशी के मारे पागल हो गया था। लेकिन सात दिन हो गए। वह हैं कहां यह किसी को नहीं पता। कोई ठीक-ठीक बताने को राजी नहीं।
पूरा ब्योरा लिखा है
आपदा पूछताछ केंद्र की प्रभारी, सीओ जया बलूनी ने बताया समस्या आ रही है दूसरे राज्यों के आपदा शिविरों से। हमें जो भी ऐसे परिजन मिल रहे हैं जिनको रेस्क्यू किया गया है। हम उसका पूरा ब्योरा लिख रहे हैं। उसके बाद हम उन्हें संबंधित राज्यों के सुपुर्द कर रहे हैं। लेकिन दूसरे राज्य के लोग कोई ब्योरा ही नहीं रख रहे हैं। बस यहीं से समस्या हो रही है।
तलाश में भटक रहा मीतेश
ऐसे तमाम तीर्थयात्री हैं, जो आपदा से तो किसी तरह बच गए पर बाद में लापता हो गए। ऐसे ही इंदौर (मध्यप्रदेश) के एक परिवार के तीन लोग हैं, जो 23 जून से लापता चल रहे हैं। केदारनाथ आपदा में लापता मां समेत परिवार के चार सदस्यों को इंदौर के मीतेश गरोडिया सप्ताहभर से तलाश कर रहे हैं।
मीतेश को मां के लौटने की आस है। मीतेश ने बताया कि उसकी मां, बड़े भाई जयप्रकाश और भाभी वर्षा तीर्थयात्रा के लिए उत्तराखंड आए थे। अंतिम बार उनसे फोन पर 23 जून को बातचीत हुई थी। उसके बाद से तीनों लापता है। मीतेश ने बताया की 23 जून को परिजनों की लोकेशन जंगलचट्टी में थी। उसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा है।
मगर कुछ पता नहीं चल सका
सहस्त्रधारा, देहरादून, जौलीग्रांट एयरपोर्ट और संयुक्त रोडवेज बस अड्डा ऋषिकेश में चल रहे राहत शिविर और अस्पताल में उन्हें तलाश किया, मगर कुछ पता नहीं चल सका। अपनों की तलाश में सुध-बुध खो चुका मीतेश अभी जौलीग्रांट अस्पताल, एयरपोर्ट के अलावा ऐसे स्थानों की खाक छान रहा है जहां उसे अपनों की कुछ खबर लग सके।