महामारी की आशंका के बीच पहाड़ पर जलप्रलय में मारे गए सैकड़ों लोगों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
डीएनए नमूना लेने के बाद बुधवार को केदारनाथ धाम में 18 शवों का सामूहिक रूप से विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
हालांकि, मृतकों के सगे-संबंधियों को केदारनाथ जाने की अनुमति नहीं दी गई। ऐसे में लोग अपनों का अंतिम दर्शन भी नहीं कर पाए।
अधिकारी अभी यह नहीं बता पा रहे हैं, अब तक कितने शव बरामद किए जा चुके हैं।
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डीएम दिलीप जावलकर ने बताया कि केदारनाथ में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रामबाड़ा और गौरीकुंड में मिले शवों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि केदारघाटी में आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है।
धाम में पंचनामा, पोस्टमार्टम, शवों की पहचान और डीएनए के नमूनों के कलेक्शन के बाद दिन में सवा तीन बजे केदारनाथ में नदी किनारे घाट पर दाह संस्कार किया गया। शाम पांच बजे तक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई।
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अंतिम संस्कार के दौरान कुछ सगे-संबंधी हेलीकॉप्टर से केदारनाथ जाना चाह रहे थे, लेकिन प्रशासन ने इसकी इजाजत नहीं दी।
आपदा में मारे गए लोगों के संबंधी अरुण वाजपेयी ने कहा कि हम अपने खर्चे से केदारनाथ जाना चाह रहे थे, लेकिन अनुमति नहीं मिली।
एसपी बीजे सिंह ने कहा कि हम कुछ लोगों को केदारनाथ जाने की अनुमति देते, तो सभी लोग यही मांग करते।