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लापता हुए, मिले और फिर हो गए लापता

Tue, 02 Jul 2013 05:57 PM IST
देहरादून/मनमीत रावत
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उत्तराखंड आपदा में लापता हुए लोगों के परिजनों के समक्ष अब एक नई समस्या आ खड़ी हुई है। आपदा प्रभावित इलाकों से बचाए गए सैकड़ों लोग कहां गए और किन हालतों में है। यह किसी को नहीं पता।
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एक तरफ पुलिस और आपदा सूचना केंद्र की लिस्ट में ऐसे लोगों के नाम दर्ज है। जबकि कई ऐसे भी हैं जिनका नाम लिस्ट में भी नहीं है। लेकिन टीवी फुटेज या अखबारों में छपी फोटो के जरिये यह तय हो गया है कि उनके अपने जिंदा है। जिन्हें रेस्क्यू कर ऋषिकेश पहुंचाया गया। लेकिन वह ऋषिकेश में हैं कहां?

इसका जवाब किसी के पास नहीं है। ऐसे सैकड़ों परिजन है जो दून पुलिस लाइन स्थित पूछताछ केंद्र से ऋषिकेश राहत शिविर तक दर दर भटक रहे हैं। एक तरफ उन्हें खुशी है कि उनके परिजन जिंदा है तो दूसरी तरफ परिजनों के अभी तक न मिलने से वह निराश भी है।
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जोधपुर के श्रीकांत ने अपनी बहन की फोटो 29 जून के अखबारों में देखी। फोटो में साफ दिख रहा है कि उसकी बहन गौचर या किसी अन्य स्थान पर आपदा से प्रभावित लोगों की लाइन में सबसे आगे लगी हुई है। एक सैन्य कर्मी श्रीकांत की बहन को चॉपर में बैठा रहा है।

यह फोटो लेकर श्रीकांत पुलिस के आलाधिकारियों के पास गया। उसने उत्साह के साथ बताया कि उसकी बहन जिंदा है। उसे सेना ने रेस्क्यू किया है। उसके बाद पुलिस और आपदा केंद्र में पूछा गया तो वहां उसकी बहन की कोई सूचना ही नहीं थी।

पुलिस अधिकारियों ने ऋषिकेश और दून के अस्पतालों की भी खाक छानी लेकिन, कोई फायदा नहीं हुआ। अधिकारी भी हैरान है, क्योंकि मामला केवल श्रीकांत की बहन का नहीं है। ऐसे मामले सैकड़ों की तादाद में है। जिनके परिजनों को रेस्क्यू किया गया है। लेकिन वह हैं कहां यह किसी को नहीं पता।

भाई साहब, कहां जाऊं, क्या करूं?
हद तो तब हो गई जब परिजनों को इंतजार करने को कहा गया। लेकिन एक हफ्ता बीत जाने के बाद कुछ पल के लिए खुश हुए परिजनों के माथे पर अब फिर से चिंता की लकीरें साफ दिखने लगी है। रोते हुए श्रीकांत बताता है ‘भाई साहब, कहां जाऊं, क्या करूं।’ अखबार में बहन का फोटो देखा तो खुशी के मारे पागल हो गया था। लेकिन सात दिन हो गए। वह हैं कहां यह किसी को नहीं पता।

आपदा पूछताछ केंद्र की प्रभारी, सीओ जया बलूनी ने बताया समस्या आ रही है दूसरे राज्यों के आपदा शिविरों से। हमें जो भी ऐसे परिजन मिल रहे हैं जिनको रेस्क्यू किया गया है। हम उसका पूरा ब्योरा लिख रहे हैं। उसके बाद हम उन्हें संबंधित राज्यों के सुपूर्द कर रहे हैं। लेकिन दूसरे राज्य के लोग कोई ब्योरा ही नहीं रख रहे हैं। बस यही से समस्या हो रही है।
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