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आखिर कहां गए केदारघाटी से 20 हजार लोग?

Fri, 21 Jun 2013 01:16 PM IST
देहरादून/ओम प्रकाश तिवारी
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भीषण आपदा के बाद गुरुवार को भी उत्तराखंड में प्रभावित इलाकों का नजारा बहुत ज्यादा नहीं बदला। राहत और बचाव में तेजी आई लेकिन अब भी करीब 25 हजार लोग फंसे हुए हैं।
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सेना ने खाने के पैकेट गिराए और लोगों को निकाला।

लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि आखिर केदारघाटी के 20 हजार लोग कहां हैं। तबाही वाली रात घाटी में करीब 30 हजार लोग थे।

तबाही के बाद राहत का इंतजार

प्रशासन का कहना है कि फंसे हुए ज्यादातर लोगों को बचाव दल ने निकाल लिया है। लेकिन आंकड़े इस दावे को गलत ठहरा रहे हैं।

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अब तक 10 हजार लोग निकाले गए
मंगलवार से शुरू राहत व बचाव कार्य के बाद अब तक 10 हजार लोग ही निकाले गए हैं। बाकी के बीस हजार कहां गए, इसका जवाब सरकार, शासन और प्रशासन के पास नहीं है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गौरीकुंड से केदारनाथ धाम के 14 किमी के पैदल ट्रैक पर 4700 खच्चर चलते हैं। आपदा वाले दिन यह सभी बुक थे।

आसमान से कैसे बरसी आफत

एक यात्री और एक खच्चर वाले को जोड़ दिया जाए तो इनकी संख्या 9400 पर पहुंच जाती है। इसी तरह पैदल ट्रैक पर 700 डंडी चलती है। एक डंडी को ले जाने के लिए चार लोग लगते हैं।
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पीक सीजन में सभी डंडी चल रही थीं। यानी डंडी ले जाने वाले 2800 लोग हुए और उनमें बैठे 700 लोगों को मिलाकर कुल 3500 लोग हो जाते हैं। इसी तरह 500 कंडी संचालित होती है।

जिंदा बचे लोगों की आपबीती

एक कंडी के साथ दो लोग होते हैं और एक यात्री बैठा होता है। इस तरह 1500 लोग यह भी हो जाते हैं। केदारनाथ से लेकर गौरीकुंड तक में 250 होटल हैं। एक होटल में कम से कम चार कर्मचारी होते हैं। इस तरह 1000 तो होटल के कर्मचारी हो जाते हैं।

केदारनाथ में मौजूद होटलों में 6000 यात्रियों के रुकने की व्यवस्था है। इसी तरह गौरीकुंड में स्थित होटलों में 8000 यात्री ठहर सकते हैं। पीक सीजन होने के कारण सभी होटल फुल थे।

कितने लोग मरे? नहीं है अनुमान

इसका मतलब यह हुआ कि दो जगहों पर 14,000 यात्री ठहरे हुए थे। इस रूट पर 700 सरकारी कर्मचारी भी हमेशा तैनात रहते हैं। स्थानीय व्यापारियों की संख्या भी 500 से अधिक रहती है।

सुलभ इंटरनेशनल के 120 कर्मचारी और 100 पुरोहित भी मौजूद थे। सभी को मिलाकर 30120 लोग तबाही वाली रात यहां थे। 10 हजार बचाए गए तो 20 हजार कहां गए-इसका जवाब कोई नहीं दे रहा है।

बहरहाल, 24,800 लोग अभी भी फंसे हुए हैं। बृहस्पतिवार को टिहरी से गुप्तकाशी तक केदारनाथ मोटर मार्ग यातायात के लिए खुल गया तो इस रास्ते से हजारों यात्री ऋषिकेश पहुंचाए गए।

प्रशासन ने इस रास्ते से 10 हजार यात्रियों को निकालने का दावा किया है। इनमें से ज्यादातर वे यात्री हैं, जो गुप्तकाशी और केदारघाटी के अन्य हिस्सों में फंसे थे। सेना और वायुसेना ने बृहस्पतिवार को लगभग 12 हजार यात्रियों को निकालने की बात कही है।

चमोली जिले से ही सेना ने बदरीनाथ, घांघरिया और गोविंदघाट में फंसे नौ हजार तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकाला है। सर्वाधिक प्रभावित केदारघाटी से हेलीकॉप्टर के जरिये 807 लोग निकाले गए।

कहर के बाद इंसानी फितरत

जंगलचट्टी से भी लगभग 400 लोगों को गौरीकुंड लाया गया है। हेलीकॉप्टर से इन्हें गुप्तकाशी, फाटा और रुद्रप्रयाग लाया जाएगा।

इसके अलावा, देहरादून से खाने के 20 हजार पैकेट लेकर सेना का हेलीकॉप्टर गुप्तकाशी पहुंचा। यहां से छोटे हेलीकॉप्टरों के जरिए खाद्य सामग्री प्रभावित क्षेत्रों में गिराई गई।

भूख-प्यास और बीमारी

बुधवार की शाम 5000 से अधिक लोग गौरीकुंड से निकलकर गौरी गांव में फंसे थे। ये लोग भूखे-प्यासे और बीमारी से ग्रस्त थे। लेकिन इनका हालचाल लेने वाला कोई नहीं है।

इनमें से एक यात्री ने फोन पर बताया कि पुलिस और जिला प्रशासन का रवैया बहुत रूखा है। राहत और बचाव कार्य बेमानी साबित हो रहे हैं। लोगों में गुस्सा इतना ज्यादा है कि उत्तराखंड के मंत्री-अफसर आपदा पीड़ितों के पास जाने से भी कतरा रहे हैं।

आसमान से नहीं दिखेगा दर्द

कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और पीएम मनमोहन सिंह दिल्ली से आसमानी सफर पर आए और ऊपर से ही नजारा देखकर चले गए। यही हाल उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का भी रहा।

बुधवार को हेलीकाप्टर में बैठकर केदार घाटी में आई तबाही को देखा। भारी नुकसान को भी स्वीकार किया। लेकिन पीड़ितों का हालचाल नहीं जाना। लेकिन कहना होगा कि लोगों की पीड़ा जाननी है तो धरती पर उतरना पड़ेगा।

फिलहाल उत्तराखंड के मंत्री-संतरी, नेता इस मामले में बहुत ही फिसड्डी साबित हुए।

--250 करोड़ का नुकसान: हिमालयन सुनामी में उत्तराखंड की 1076 सड़कें बर्बाद हो चुकी हैं। 94 सेतु बह गए हैं, जिससे 250 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।

--90 धर्मशालाएं केदारनाथ में बाढ़ में बहीं, इन धर्मशालाओं में ठहरे थे सैकड़ों लोग। संचार व्यवस्थाएं ध्वस्त होने से नहीं हो पा रहा संपर्क।

--400-500 लोगों को केदारघाटी से निकालने के लिए शुक्रवार को अभियान शुरू करेगी सेना।

--17 शव बरामद किए गए केदारनाथ के आसपास से।

--22,392 लोगों को पहुंचाया गया सुरक्षित जगह।

--62122 लोग अब भी फंसे हैं कई जगहों पर।

--50 बड़े भूस्खलनों से बंद हो गए चार प्रमुख मार्ग। इनमें रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड, ऋषिकेश-जोशीमठ-माना, ऋषिकेश-धारासु-गंगोत्री और पिथौरागढ़-घाटियाबगढ़ मार्ग शामिल।
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