राजकीय दून मेडिकल कॉलेज का टीचिंग अस्पताल बनने के बाद दून महिला अस्पताल में गर्भवतियों के इलाज में मुश्किल होने लगी है। टीचिंग अस्पताल का हिस्सा बनने के बाद बेड घटने के कारण यह समस्या पैदा हो रही है।
दून अस्पताल और दून महिला अस्पताल का एकीकरण कर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज का टीचिंग अस्पताल बनाया गया है। इसके बाद अस्पताल में विभाग और उनमें बेड की संख्या मेडिकल कॉउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों के अनुसार की जा रही है।
ऐसा होने के चलते अस्पताल में जहां कुछ नए विभाग खुले हैं वहीं पुराने विभागों में भी बेड की संख्या कम-ज्यादा हुई है। सबसे ज्यादा असर स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग पर पड़ा है। दून महिला अस्पताल में जहां कुल 111 बेड थे, वहीं यह अब घटकर 45 ही रह गए हैं।
बेड घटने के चलते अस्पताल में गर्भवती महिलाओं को भर्ती करने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। जांच के बाद बेड खाली ना होने के कारण कई महिलाओं को उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है।
बिलिंग में भी परेशानी
टीचिंग अस्पताल में सेंट्रल बिलिंग सिस्टम लागू होने के बाद महिलाओं को रजिस्ट्रेशन और बिलिंग में भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बिलिंग काउंटर में दोनों अस्पतालों के मरीजों की भीड़ होने के चलते समय ज्यादा लग रहा है।
एमसीआई के मानकों के अनुसार अस्पताल में व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत ही स्त्री एवं प्रसूति रोग के बेड घटे हैं। अलग महिला अस्पताल बनने के बाद यह दिक्कत नहीं रहेगी।
-डा. केके टम्टा, चिकित्सा अधीक्षक