उत्तराखंड के जख्मों पर रविवार को बारिश का पानी नमक बनकर गिरा। बारिश और बादल ने मुश्किल हालात में फंसे हजारों लोगों की मुश्किलें और बचाव में जुटे जवानों की चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि मंगलवार सुबह तक भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद भी कुछ दिन हल्की बारिश होती रहेगी। ऐसे में सोमवार को सेना अब फंसे लोगों को पैदल रास्तों से निकालने पर जोर देगी।
वहीं, रविवार शाम ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिरोहबगड़ के पास भारी मात्रा में मलबा आने से राजमार्ग बंद हो गया है।
रविवार को देहरादून और रुद्रप्रयाग के गौरीकुंड में बारिश हुई। कई जगह धुंध और बादल छाए रहे। इससे हेलीकॉप्टर की उड़ानों में देरी हुई।
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खराब मौसम के बावजूद बचाव कार्य में जुटी सेना और वायुसेना ने हजारों फंसे यात्रियों को एयरलिफ्ट कर लिया है। सेना की स्पेशल फोर्स ने केदारघाटी के जंगलचट्टी और साथ लगते क्षेत्रों से सात दिन से फंसे लगभग हजार यात्रियों को सुरक्षित जगह पहुंचाया है।
सोमवार से सेना ‘सूर्य होप अभियान’ का फेज थ्री शुरू कर रही है। इसके तहत सेना बेहद दुर्गम पैदल मार्गों से हर्षिल, गौरीकुंड और बदरीनाथ से लोगों को देहरादून, जोशीमठ और ऋषिकेश पहुंचाएगी।
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बारिश हुई तो केदारघाटी, उत्तरकाशी और चमोली जिले में खोली गईं सड़कों पर मलबा आने का खतरा होगा। इससे यहां फंसे यात्रियों और सेना की परेशानी बढ़ सकती है।
सरकार और सेना के मुताबिक केदारनाथ, गौरीकुंड, उत्तरकाशी, अगस्त्यमुनि से ज्यादातर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा दिया गया है लेकिन सौ लोग अब भी केदारनाथ मार्ग पर गौरीकुंड में फंसे हैं।
केदारघाटी में विनाश लीला: बीते 9 दिनों की कहानी
उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, कुल आठ हजार अब भी फंसे हुए हैं जबकि 14 हजार लोगों को डेंजर जोन से निकाला गया है। 1329 लोग केदारघाटी से निकाले गए, जिसमें से 979 को सेना ने निकाला है। 1200 यात्रियों को गुप्तकाशी से दून, ऋषिकेश, हरिद्वार भेजा गया है।
वहीं, 1135 लोग चमोली जिले में गोविंदघाट से, 1495 यात्री बदरीनाथ धाम से निकाले गए हैं। यमुनोत्री धाम में फंसे 700 यात्रियों को निकाला गया है।
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450 लोग उत्तरकाशी जिले के हर्षिल से, 400 लोग मनेरी-भटवाड़ी से और 200 लोग जानकीचट्टी से सुरक्षित निकाले गए। 5902 लोग अब तक रुद्रप्रयाग से निकाले जा चुके हैं। पुलिस का कहना है केदारनाथ से सभी यात्री निकाल लिए गए हैं।
खराब मौसम से बढ़ी परेशानी
उत्तराखंड में अब तक का सबसे बड़ा बचाव अभियान चला रही वायुसेना ने कहा है कि फंसे लोगों को निकालने में कम से कम एक हफ्ता और लग जाएगा। वह भी तब जब मौसम साथ दे।
एयर कमोडोर राजेश इस्सर ने कहा कि वायुसेना के इतिहास में हेलीकॉप्टरों के जरिए किया जाने वाला यह सबसे बड़ा ऑपरेशन है। खराब मौसम से थोड़ी मुश्किल आ रही है। लेकिन हम तेजी से काम कर रहे हैं।
राष्ट्रपति दान करेंगे एक माह का वेतन
उत्तराखंड में आई प्राकृतिक आपदा से आहत राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपना एक महीने का वेतन दान करेंगे। राष्ट्रपति भवन के सूत्रों के मुताबिक मुखर्जी ने वेतन संबंधी अपने विभाग को जून महीने का वेतन उत्तराखंड राहत कोष में भेजने का निर्देश दिया है।
राष्ट्रपति का वर्तमान वेतन लगभग डेढ़ लाख रुपये है। इस त्रासदी के कारण राष्ट्रपति ने अपनी हिमाचल प्रदेश की वार्षिक यात्रा पहले ही रद्द करने की घोषणा की है।
खराब मौसम से बचाव अभियान दिन में पांच से छह घंटे प्रभावित हुआ, लेकिन बाद दोपहर से हैलीकाप्टर सेवा पूरी तरह से प्रभावी कर दी गई।--लेफ्टिनेंट जनरल एनएस बाबा, एरिया कमांडर उत्तर भारत
‘नेत्र’ की नजरें करेंगी तलाश
फंसे लोगों का पता लगाने के लिए आज से मानव रहित विमान ‘नेत्र’ की मदद ली जाएगी।
साधुओं को मनाने की कोशिश
कुछ साधुओं ने केदारनाथ इलाके से लौटने से इंकार कर वहां बचाव अभियान में जुटे जवानों की मुश्किल बढ़ा दी है। आईटीबीपी के डीआईजी अमित प्रसाद ने कहा कि 15-20 साधुओं ने वहां से लौटने से इंकार कर दिया, लेकिन हमने अपने जवानों से उन्हें मनाने को कहा है क्योंकि वहां शव बिखरे पड़े हैं, जिससे वहां बीमारी फैलने का खतरा है।
मिसिंग हेल्पलाइन
लापता चल रहे लोगों की जानकारी के रुद्रप्रयाग पुलिस ने मिसिंग हेल्पलाइन शुरू की है। लापता लोगों के नाम-पते और फोटो और अन्य जानकारियां उनके संबंधी फोन पर नोट करा सकते हैं। लापता लोगों का डाटा बैंक बनाया जाएगा।
ये हैं फोन नंबर
9411503538
8755859365
8006588740
चुनौतियां और आशंकाएं
--बेहद दुर्गम स्थानों से खराब मौसम में लोगों को सुरक्षित निकालना सबसे बड़ी चुनौती।
--सड़कें बंद होने के चलते पहाड़ी रास्तों से लाने में भारी खतरा।
--बारिश की स्थिति में मलबे से रुकेगी राह, भूस्खलन का खतरा।
--नदी, नाले में उफान की आशंका, इन्हें पार करना मुश्किल होगा।
--फंसे लोगों में कई लोग बीमार, पैदल चलने की स्थिति में नहीं।
--ऐसे लोगों को पीठ पर लादकर सुरक्षित स्थानों तक लाना होगा।
--हर्षिल से उत्तरकाशी का लगभ्ाग 74 किलोमीटर का ट्रैक बेहद खराब हाल में है।
--बारिश होने की स्थिति में यह मार्ग पूरी तरह से बंद हो सकता है।
--बीआरओ के मजदूर और मशीनों को तेजी से करना होगा काम।
--बारिश की स्थिति में जरूरत पड़ने पर नहीं उड़े पाएंगे हेलीकॉप्टर।
--राहत सामग्री की सप्लाई पहुंचाने में बारिश डाल सकती है अड़ंगा।