रुद्रप्रयाग के केदारनाथ और आसपास के क्षेत्रों में ‘हिमालयन सुनामी’ के बाद अब ठंड, भूख प्यास से मौतें शुरू हो गई हैं। बृहस्पतिवार को केदारनाथ वन्यजीव विहार के जंगल में 25 पर्यटकों की ऐसे ही मौत हो गई।
यह दर्दनाक मौत एनडीआरएफ (नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स) के आंखों के सामने हुई। जवान रेस्क्यू करने के लिए जंगल में पहुंचे हुए थे, लेकिन रेस्क्यू करते समय ही इन लोगों की मौत हो गई।
तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार
जवानों ने इस हादसे की जानकारी राहत एवं बचाव कार्य के लिए तैनात किए गए आईएएस एवं एमडीडीए वीसी आर मीनाक्षी सुंदरम से दी।
सरकार के निर्देश पर एमडीडीए वीसी आर मीनाक्षी सुंदरम बृहस्पतिवार सुबह हेलीकाप्टर से रुद्रप्रयाग के लिए रवाना हुए। हेलीकाप्टर से ही उन्होंने केदारनाथ और आसपास के क्षेत्रों का जायजा लिया।
शाम के समय उन्होंने गुप्तकाशी में रुककर कैंप शुरू कर दिया। राहत एवं बचाव कार्य को लेकर सभी विभागों के अधिकारियों की बैठक भी ली। रात लगभग आठ बजे फोन पर बताया कि हवाई दौरे के दौरान केवल लाशें ही नजर आ रही थीं।
केदारनाथ मंदिर परिसर में 25 से 30 लाशें पड़ी नजर आई। यह संख्या अधिक भी हो सकती है।
जंगलों में फंसे हैं कई लोग, दम तोड़ने लगी जिंदगी
रुद्रप्रयाग। पिछले पांच दिनों से जंगलों और अन्य स्थानों में फंसे लोगों की हालत बिगड़ने लगी है। पहले आपदा ने उनकी परीक्षा ली। किसी तरह जान बची तो अब समय पर राहत नहीं मिल पा रही है।
सोनप्रयाग से केदारनाथ तक जंगलों में कई लोग फंसे हुए हैं। सबसे अधिक दिक्कत जंगलचट्टी, रामबाड़ा, गरुड़चट्टी और धिनुरपाणी सहित कुछ क्षेत्रों में हैं। यहां लोगों को खाद्य सामग्री, पानी और दवाइयां नहीं मिल पा रही हैं।
तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत
पांच-छह दिन से बारिश और कीचड़ में सने कपड़े पहने हुए हैं। ऐसे लोगों की हालत नाजुक है। कुछ लोगों का कहना है कि केदारनाथ से पहले गरुड़चट्टी में महंत अविराम दास जी की हनुमान गुफा में लगभग 11 सौ लोग फंसे हुए हैं।
अगस्त्यमुनि रैन बसेरे में 35 लोग पांच दिन से रुके हुए हैं। दोनों ओर सड़क अवरुद्ध होने के कारण वह कहीं न जा पा रहे हैं। उनके परिचित ने भी कंट्रोल रूम में सूचना दी है कि उनके साथ बुजुर्ग और बच्चों की हालत बिगड़ रही है।