उत्तराखंड में आपदा का जबड़ा क्या खुला, देवभूमि विभिन्न वैज्ञानिक, शोध संस्थानों की प्रयोगशाला बन गई। कोई साइको सोशल एनालिसिस के लिए तो कोई आफ्टर शाक एनालिसिस के नाम पर राज्य का रुख कर रहा है।
ऐसा करने वालों में देसी ही नहीं, विदेशी संस्थानों के विशेषज्ञ भी बड़ी संख्या में शामिल हैं।
जियो टेक्निकल टीम ले रही जायजा
वैज्ञानिक, शोध संस्थानों की बात करें तो वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान की जियो टेक्निकल टीम क्षेत्र में हुए बदलावों का जायजा ले रही है। वह पहले भी क्षेत्र में लैंड स्लाइड, भूकंप आदि से जुड़े अध्ययनों को अंजाम दे चुकी है। रिपोर्ट तैयार कर चुकी है। अब उसके अध्ययन का केंद्र केदारघाटी है, जहां उसकी ग्लेशियर आब्जरवेटरी है। राष्ट्रीय जल संस्थान यानी एनआईएच की भी आब्जरवेटरी के वैज्ञानिक जल संबंधी बदलावों का अध्ययन कर रहे हैं।
जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया यानी जीएसआई की अपनी टीम गई है ताकि भूगर्भीय बदलावों का पता लगाया जा सके। इसके आधार पर पुनर्वास की बात की जा सके, संभावित खतरों से बचा जा सके। देश के अन्य आपदा संभावित क्षेत्रों के लिए किस तरह की योजना बनाई जा सकती है, उसके लिए यहां के अध्ययन को आधार बनाया जा सके।
यहां पढ़े उत्तराखंड आपदा संबंधित सभी खबरें
विश्लेषण को इन्हीं के साथ आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया यानी एएसआई के विशेषज्ञों की टीम पहुंची है ताकि केदारधाम समेत इस क्षेत्र में मौजूद अन्य मंदिरों की स्थिति का जायजा लिया जा सके। इनके पुनरुद्वार के लिए जरूरी कदम सुझाए जा सकें। भविष्य में किसी तरह की आपदा के मद्देनजर सचेत किया जा सके।
प्रभाव का अध्ययन
जवाहर लाल नेहरू सेंटर फार एडवांस्ड साइंटिफिक स्टडीज के विशेषज्ञ हैं ताकि स्लोप यानी ढलानों में आए बदलाव और भविष्य पर प्रभाव का अध्ययन किया जा सके। यह तो थी क्षेत्र में होने वाली क्षति की बात। अब बात मानवीय पहलू की। आपदा में अपनों को खोने वालों के व्यवहार में किस तरह का बदलाव देखने को मिल रहा है।
उन्हें इस संकट से किस तरह उबारा जा सकता है और भविष्य में सचेत रहने के लिए इस आपदा को कैसे केस स्टडी के रूप में प्रयोग किया जा सकता है, इसका विश्लेषण इंडियन इंस्टीट्यूट आफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज के विशेषज्ञ कर रहे हैं। विदेशी संस्थान भी इनमें पीछे नहीं।
क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं विशेष्ाज्ञ
जर्मनी की एएचडब्लू संस्था की टीम लोगों के भीतर भावनात्मक बदलावों पर अध्ययन यानी आफ्टरशाक एनालिसिस की बात कर रही है तो वहीं हालैंड की डाक्टर्स विदाउट बार्डर्स संस्था आपदा में अपनों को खोने वाले लोगों के साइको सोशल एनालिसिस की।
इसके लिए न सिर्फ वह क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं, वरन यहां के लोगों से बात-चीत कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इन सारे संस्थानों, संस्थाओं का आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जमावड़ा बेशक आपदा प्रभावितों को सदमे से उबरने, क्षेत्र की वर्तमान स्थिति सुधारने में मदद करे। लेकिन इन सभी के लिए यह क्षेत्र एक प्रयोगशाला की शक्ल ले चुका है।
इस खबर पर राय देने के लिए क्लिक करें