यूपी के मंत्री साहब सिंह सैनी के केहरी गांव स्थित निर्माण की जमीन को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी है। शनिवार को एमडीडीए के अधिकारी मौके पर पहुंचे। मास्टर प्लान में जमीन अनडिफाइंड एरिया (अपरिभाषित क्षेत्र) की निकली।
इस मामले की जांच के लिए चार विभागों की संयुक्त टीम बनाने का फैसला किया गया। वहीं दूसरे पक्ष ने कैंट बोर्ड के सचिव को ज्ञापन भेजकर जमीन के लैंड यूज और निर्माण के जांच की मांग की।
केहरी गांव में बृहस्पतिवार को स्थानीय लोगों ने एक निर्माण को लेकर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी पर गंभीर आरोप लगाए थे। कई स्तरों पर शिकायत होने के बाद एमडीडीए अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया था।
मास्टर प्लान देख बोले अधिकारी, जमीन अपरिभाषित क्षेत्र में
अधिकारियों ने शनिवार को जमीन की माप कर उसका अधिकार क्षेत्र तय करने की बात कहकर यथावत स्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। शनिवार को एक बार फिर एमडीडीए की टीम मौके पर पहुंची।
मास्टर प्लान देखने के बाद उन्होंने बताया कि यह जमीन अपरिभाषित क्षेत्र में है। कैंट बोर्ड या एमडीडीए का क्षेत्र है, इसको लेकर विवाद है। अपरिभाषित क्षेत्र में निर्माण पर वैसे भी रोक है। बाकि जमीन किसके अधिकार क्षेत्र में है, इसको लेकर कैंट बोर्ड, एमडीडीए, शहरी विकास विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर जांच की जाएगी।
जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि वह जमीन किसके अधिकार क्षेत्र में है। एमडीडीए उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि अभी जमीन के अधिकार क्षेत्र को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।